कोलकाता चोरबागान भगदड़: पूजा कमेटी के पदाधिकारियों समेत 7 गिरफ्तार, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिन दुर्गापूजा पंडाल में हुई भगदड़ के मामले में पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में पूजा कमेटी के सचिव और उपाध्यक्ष के अलावा एक निजी सुरक्षा एजेंसी के दो अधिकारी भी शामिल हैं। पुलिस ने पूजा आयोजकों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है।
इस कार्रवाई के बाद दुर्गापूजा पंडाल में सुरक्षा इंतजामों और भीड़ प्रबंधन को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस हादसे के कारणों का पता लगाने के साथ यह भी जांच कर रही है कि आयोजन के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था की जांच
गिरीश पार्क थाने में दर्ज मामले के आधार पर पुलिस ने जांच तेज कर दी है। जांच अधिकारी पंडाल में भीड़ की स्थिति, प्रवेश और निकास द्वारों की व्यवस्था तथा लोगों को नियंत्रित करने के लिए किए गए इंतजामों की पड़ताल कर रहे हैं।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि भीड़ का दबाव बढ़ने पर आयोजकों और सुरक्षा कर्मचारियों ने क्या कदम उठाए थे। इसके अलावा, आपात स्थिति में लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए पर्याप्त व्यवस्था थी या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
पूजा कमेटी के पदाधिकारियों और निजी सुरक्षा एजेंसी के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है। पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
चोरबागान और आसपास के इलाकों में निषेधाज्ञा
भगदड़ की घटना के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने चोरबागान और आसपास के क्षेत्रों में तीन दिनों तक निषेधाज्ञा लागू की है। इसके तहत पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध लगाया गया है।
सेंट्रल एवेन्यू, कॉलेज स्ट्रीट और कोलूटोला सहित कई इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू की गई है। प्रशासन का उद्देश्य इलाके में शांति बनाए रखना और घटना के बाद किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना है।
पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि भगदड़ किन परिस्थितियों में हुई, सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक थी या नहीं और हादसे के लिए जिम्मेदारी किसकी बनती है।
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