100 दिन जेल में रखने पर ट्रंप सरकार के खिलाफ महमूद खलील का केस, ₹171 करोड़ की मांग

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फिलिस्तीन समर्थक छात्र नेता महमूद खलील ने ट्रंप प्रशासन पर ठोका केस, मांगा ₹171 करोड़ मुआवजा

कोलंबिया यूनिवर्सिटी के छात्र और फिलिस्तीन समर्थक एक्टिविस्ट महमूद खलील ने अमेरिका में अपने 100 दिन से ज्यादा की हिरासत को लेकर पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के खिलाफ केस दर्ज किया है। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें राजनीतिक कारणों से गलत तरीके से हिरासत में लिया गया और इसके एवज में 20 मिलियन डॉलर (करीब ₹171 करोड़) के मुआवजे की मांग की है।

खलील का आरोप है कि उन्हें बिना वैध कारण के आव्रजन अधिकारियों ने हिरासत में लिया और उनकी रिहाई में जानबूझकर देरी की गई। जबकि वह अमेरिका में वैध स्थायी निवासी हैं, एक अमेरिकी महिला के पति हैं और एक अमेरिकी मूल के बच्चे के पिता भी हैं।

104 दिन की हिरासत के बाद कोर्ट से रिहाई
मार्च 2024 में खलील को आव्रजन अधिकारियों ने हिरासत में लिया था। उन्हें एक जज द्वारा जमानत दिए जाने के कुछ ही घंटों बाद लुइसियाना के एक डिटेंशन सेंटर से रिहा किया गया। उनके समर्थन में काम करने वाले ‘सेंटर फॉर कांस्टीट्यूशनल राइट्स’ का कहना है कि खलील को डराने और चुप कराने के लिए यह कदम उठाया गया।

खलील की याचिका में कहा गया है कि इस हिरासत ने उन्हें “गंभीर मानसिक तनाव, आर्थिक नुकसान और सामाजिक प्रतिष्ठा की हानि” पहुंचाई है।

विरोध प्रदर्शनों का चेहरा थे खलील
खलील हाल ही में गाजा में इज़रायली कार्रवाई के खिलाफ अमेरिका के प्रमुख छात्र प्रदर्शनों में अग्रणी भूमिका निभा रहे थे। ट्रंप प्रशासन ने उन्हें “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा” बताते हुए निशाने पर लिया। खलील का दावा है कि उनकी गिरफ्तारी राजनीतिक बदले की कार्रवाई थी।

“मेरे जीवन के 104 दिन मुझसे छीन लिए गए,” खलील ने कहा। “मेरे पहले बच्चे के जन्म के दौरान मुझे जानबूझकर अलग रखा गया। यह राजनीतिक प्रतिशोध और सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण है, जिसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।”

सरकार का पक्ष: ‘हिरासत वैधानिक थी’
ट्रंप प्रशासन की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की सहायक सचिव ट्रिसिया मैकलॉघलिन ने कहा, “सरकार ने वैधानिक और संवैधानिक अधिकारों के तहत कार्रवाई की। खलील जैसे लोग जो हिंसा की वकालत करते हैं, आतंकवादियों को महिमामंडित करते हैं, यहूदी विरोधी बयान देते हैं और संपत्ति को नुकसान पहुंचाते हैं—उन्हें हिरासत में लेना उचित था।”

महमूद खलील की याचिका अमेरिका की आव्रजन नीतियों, राजनीतिक प्रदर्शन की स्वतंत्रता और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर एक अहम कानूनी चुनौती बनकर उभरी है। अब देखना यह है कि अदालत इसका क्या रुख लेती है।

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