बिहार में वोटर लिस्ट से गायब 35 लाख नाम! चुनाव आयोग राजनीतिक दलों से करेगा डेटा साझा

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बिहार वोटर लिस्ट रिवीजन में बड़ा खुलासा: 35 लाख नाम हट सकते हैं, चुनाव आयोग राजनीतिक दलों को देगा डिटेल्स

बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने बताया है कि करीब 35.69 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए जा सकते हैं, क्योंकि वे क्षेत्रीय सत्यापन के दौरान अपने पते पर नहीं पाए गए।

इनमें से 12.5 लाख मतदाता मृत घोषित किए गए, जबकि 17.5 लाख लोग स्थायी रूप से पलायन कर चुके हैं। इसके अलावा, 5.5 लाख नाम दोहराव या अयोग्यता के कारण चिन्हित किए गए हैं, क्योंकि वे एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत हैं।

54 लाख ने अब तक फॉर्म नहीं भरा
चुनाव आयोग ने बताया कि बिहार के 7.89 करोड़ मतदाताओं में से अब तक 88.6% ने अपने फॉर्म जमा किए हैं, लेकिन करीब 54 लाख लोगों ने अभी तक गणना प्रपत्र नहीं सौंपा है। 25 जुलाई को इस प्रक्रिया की अंतिम तारीख है, और आयोग ने शेष 6.85% मतदाताओं से समय रहते फॉर्म भरने की अपील की है।

राजनीतिक दलों से साझा होगा डेटा
चुनाव आयोग 17 जुलाई से उन 35.6 लाख मतदाताओं के नाम और विवरण मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ साझा करेगा, जिन्हें ‘गैर-मौजूद’ के रूप में चिह्नित किया गया है। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि कोई भी नाम मतदाता सूची से अंतिम रूप से हटाने से पहले राजनीतिक दल स्थिति की पुष्टि कर सकें।

विदेशी नागरिकों की पहचान भी
इस प्रक्रिया के दौरान, नेपाल, म्यांमार और बांग्लादेश के कुछ विदेशी नागरिकों की पहचान भी मतदाता सूची में दर्ज होने के रूप में हुई है। आयोग ने कहा कि दस्तावेज़ सत्यापन के बाद ऐसे नाम हटा दिए जाएंगे। हालांकि, प्रभावित लोगों को नागरिकता और पात्रता के वैध प्रमाण प्रस्तुत कर अपील का अधिकार प्राप्त है — पहले जिला कलेक्टर और फिर मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष।

फिलहाल, आयोग ने बिहार में चिन्हित विदेशी नागरिकों की कुल संख्या साझा नहीं की है।

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