मॉनसून बना किसानों का सहारा, खरीफ बुवाई में आई तेजी

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समय से पहले मॉनसून का असर, खरीफ फसलों की बुवाई में 37 लाख हेक्टेयर की बढ़ोतरी

देश में खरीफ फसलों की बुवाई इस साल रफ्तार पकड़ रही है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, 11 जुलाई 2025 तक खरीफ फसलों की कुल बुवाई 597.86 लाख हेक्टेयर दर्ज की गई — जो पिछले साल की इसी अवधि (11 जुलाई 2024) के मुकाबले 37.27 लाख हेक्टेयर अधिक है।

चावल और दलहन में सबसे अधिक बढ़ोतरी
बुवाई में सबसे उल्लेखनीय वृद्धि चावल और दलहन फसलों में देखी गई है। चावल की बुवाई इस साल 11.84 लाख हेक्टेयर बढ़ी है — 2024 में यह 111.85 लाख हेक्टेयर थी, जो अब 123.68 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई है।

वहीं दलहन फसलों ने चावल से भी अधिक बढ़त दर्ज की। 2024 में जहां दलहन की बुवाई 53.39 लाख हेक्टेयर थी, वह अब बढ़कर 67.09 लाख हेक्टेयर हो गई है — यानी 13.69 लाख हेक्टेयर की वृद्धि। जानकारों का मानना है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी के जरिए सरकार द्वारा लगातार प्रोत्साहन देने से दलहन बुवाई को बल मिला है।

मॉनसून ने निभाई बड़ी भूमिका
इस बार दक्षिण-पश्चिम मॉनसून ने सामान्य तिथि से नौ दिन पहले ही — यानी 29 जून को — पूरे देश को कवर कर लिया, जबकि आमतौर पर यह प्रक्रिया 8 जुलाई तक पूरी होती है। समय पर और व्यापक बारिश ने खेतों में नमी की स्थिति को बेहतर किया, जिससे किसानों को बुवाई कार्य जल्दी शुरू करने का अवसर मिला।

आगे की उम्मीदें
खरीफ सीज़न की मजबूत शुरुआत से सरकार को खाद्य सुरक्षा और उत्पादन लक्ष्यों को लेकर उम्मीदें बढ़ी हैं। अगर मॉनसून इसी तरह अनुकूल बना रहा, तो आने वाले महीनों में खाद्यान्न उत्पादन के आंकड़े और भी बेहतर हो सकते हैं।

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