इजराइल हमले के खिलाफ दोहा में मुस्लिम देशों की एकजुटता, कतर को मिला मजबूत समर्थन
कतर की राजधानी दोहा पर 9 सितंबर को हुए इजराइली हमले के बाद सोमवार को आपातकालीन अरब-मुस्लिम सम्मेलन बुलाया गया। इसमें सऊदी अरब, ईरान, तुर्की, पाकिस्तान, जॉर्डन, मिस्र और सीरिया समेत 50 से अधिक मुस्लिम देशों ने भाग लिया। सभी नेताओं ने इजराइल के हमले की निंदा की और कतर के साथ पूर्ण एकजुटता जताई।
कतर के अमीर शेख तमीम ने इस हमले को “कायरतापूर्ण और विश्वासघाती” बताया। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान ने इजराइल को “आतंकवादी मानसिकता वाला देश” करार दिया और मुस्लिम देशों से राजनयिक दबाव बढ़ाने की अपील की। वहीं, ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने इजराइल से संबंध तोड़ने और आर्थिक-सांस्कृतिक बहिष्कार की मांग की।
जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला, मिस्र के राष्ट्रपति सीसी और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने भी इजराइल पर कड़ा रुख अपनाने पर जोर दिया। फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने कहा कि कतर पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और क्षेत्रीय शांति के लिए गंभीर खतरा है।
अरब लीग और OIC नेताओं ने संयुक्त राष्ट्र से मांग की कि इजराइल को उसके अपराधों के लिए जवाबदेह ठहराया जाए। सम्मेलन ने साफ संदेश दिया कि मुस्लिम देश अब इजराइल की आक्रामकता के खिलाफ एकजुट रहेंगे।
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