ट्रंप के दबाव के बाद NATO देशों ने बढ़ाया रक्षा खर्च का लक्ष्य, 2035 तक GDP का 5% खर्च करने की प्रतिबद्धता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख के बाद NATO के 32 सदस्य देशों ने अपने रक्षा बजट को बढ़ाने पर सहमति जताई है। नए फैसले के तहत सभी सदस्य देश अब 2035 तक रक्षा और सुरक्षा पर अपनी जीडीपी का 5% तक खर्च करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह अब तक के 2% के पारंपरिक लक्ष्य से कहीं अधिक है।
NATO नेताओं ने एक संयुक्त बयान में कहा कि सदस्य देश व्यक्तिगत और सामूहिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह निवेश करेंगे, जिसमें हथियारों, सैन्य क्षमताओं के विकास के साथ-साथ साइबर सुरक्षा और रणनीतिक बुनियादी ढांचे की सुरक्षा भी शामिल है।
रूस को लेकर बढ़ती चिंता, सामूहिक सुरक्षा की पुनः पुष्टि
यूक्रेन युद्ध के बाद यूरोपीय देशों में रूस को लेकर खतरा लगातार बढ़ा है। इस संदर्भ में नाटो देशों ने अपनी सबसे बुनियादी प्रतिबद्धता — “एक पर हमला, सभी पर हमला” — को फिर दोहराया है। इस सुरक्षा सिद्धांत के तहत किसी एक सदस्य देश पर हमले को पूरे संगठन पर हमला माना जाता है।
स्पष्ट चेतावनी के बाद ट्रंप को मिली ‘संतुष्टि’
राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि सदस्य देश रक्षा खर्च को लेकर गंभीर नहीं हुए तो अमेरिका भी उनके समर्थन से पीछे हट सकता है। उन्होंने कहा, “मैं जिंदगियां बचाने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हूं।” ट्रंप के दबाव का असर स्पष्ट रूप से घोषणाओं में दिखाई दिया।
हालांकि, स्पेन ने इस लक्ष्य को लेकर लचीलापन दिखाते हुए कहा है कि वह कम संसाधनों में भी अपनी रक्षा प्रतिबद्धताओं को पूरा कर सकता है। ट्रंप ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है।
रूटे और फिनलैंड ने किया नए NATO का स्वागत
NATO के नए महासचिव मार्क रूटे ने माना कि यह वित्तीय चुनौती आसान नहीं होगी, लेकिन मौजूदा वैश्विक परिदृश्य में यह अनिवार्य है। उन्होंने कहा, “रूस से खतरे और वैश्विक अस्थिरता को देखते हुए विकल्प नहीं बचा है।”
फिनलैंड, जो हाल ही में नाटो में शामिल हुआ है और जो रूस की सीमा से सटा हुआ है, ने इस परिवर्तन को “नए और संतुलित नाटो” की दिशा में एक अहम कदम बताया है। राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने कहा कि यूरोप अब अपनी रक्षा ज़िम्मेदारियों को अधिक गंभीरता से ले रहा है।
यूक्रेन को मिल सकती हैं और पैट्रियट मिसाइलें
शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की की 50 मिनट लंबी बैठक हुई, जिसके बाद ट्रंप ने यूक्रेन को अतिरिक्त पैट्रियट वायु रक्षा प्रणाली देने पर सहमति का संकेत दिया। यह मिसाइलें रूस के मिसाइल हमलों से निपटने में यूक्रेन के लिए बेहद अहम मानी जाती हैं।
ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध को “अब तक का सबसे कठिन संघर्ष” बताते हुए कहा कि यह संघर्ष जितना लंबा खिंच रहा है, उससे समाधान की जटिलता और बढ़ रही है।
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