20 लाख छात्रों के भविष्य की परीक्षा, 5454 केंद्रों पर सख्त निगरानी में हुआ NEET-UG

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पेपर लीक विवाद के बाद दोबारा आयोजित की गई नीट-यूजी परीक्षा रविवार को देशभर में अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्वक संपन्न हो गई।

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) और शिक्षा मंत्रालय के लिए राहत की बात यह रही कि परीक्षा के दौरान कहीं से भी किसी गड़बड़ी या पेपर लीक की सूचना नहीं मिली। मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश का सपना संजोए 20 लाख से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य अब उनकी ओएमआर शीट में दर्ज हो चुका है।

एनटीए के अनुसार, परीक्षा देश के 551 शहरों में स्थित 5,440 केंद्रों और विदेश के 14 शहरों में बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर एक साथ आयोजित की गई। इस बार परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की कई एजेंसियों ने मिलकर करीब 37 दिनों तक तैयारी की थी।

पेपर लीक की आशंकाओं और अफवाहों को देखते हुए सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए थे। प्रत्येक केंद्र पर स्थानीय पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती रही, जबकि साइबर निगरानी के लिए हर शहर में विशेष कमांडो तैनात किए गए। परीक्षा कक्षों और केंद्रों की निगरानी के लिए 1.38 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए तथा इलेक्ट्रॉनिक धोखाधड़ी रोकने के लिए 53 हजार से ज्यादा जैमर इस्तेमाल किए गए।

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी एनटीए मुख्यालय पहुंचकर कंट्रोल रूम से परीक्षा की निगरानी की। वहीं एनटीए ने सोशल मीडिया पर वायरल उन वीडियो को फर्जी बताया, जिनमें पेपर लीक होने का दावा किया गया था। एजेंसी ने ऐसे वीडियो फैलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही है।

इस बार छात्रों को राहत देते हुए परीक्षा अवधि में 15 मिनट का अतिरिक्त समय दिया गया। इससे अभ्यर्थियों को जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद प्रश्नपत्र हल करने के लिए पर्याप्त समय मिल सका। परीक्षा दोपहर 2 बजे शुरू होकर शाम 5:15 बजे समाप्त हुई।

एनटीए ने विशेष जरूरतों वाले छात्रों के लिए भी अलग व्यवस्थाएं की थीं। करीब 10 हजार दिव्यांग अभ्यर्थियों के अलावा गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे कई छात्रों ने भी परीक्षा दी। इनमें हाल ही में सड़क दुर्घटना में घायल हुई कोलकाता की एक छात्रा और कीमोथेरेपी करा रहा एक छात्र भी शामिल था।

परीक्षा के सफल आयोजन के लिए एनटीए ने इसे ‘टीम भारत’ का सामूहिक प्रयास बताया। एजेंसी के अनुसार शिक्षा, गृह, स्वास्थ्य, रक्षा और विदेश मंत्रालय समेत भारतीय वायुसेना, डाक विभाग, केंद्रीय सुरक्षा बलों और विभिन्न बैंकों ने इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी छात्रों की सुविधा को प्राथमिकता दी। सूत्रों के मुताबिक, कोलकाता से लौटने के बाद उन्होंने परीक्षा शुरू होने तक करीब 45 मिनट दिल्ली एयरपोर्ट पर ही बिताए, ताकि उनके काफिले की वजह से लगने वाले संभावित ट्रैफिक जाम से छात्रों को परीक्षा केंद्र पहुंचने में कोई परेशानी न हो।

हालांकि, दोबारा आयोजित परीक्षा में अनुपस्थित रहने वाले छात्रों की संख्या बढ़ी है। करीब 22.79 लाख पंजीकृत अभ्यर्थियों में से लगभग 20 लाख छात्र ही परीक्षा में शामिल हुए, जबकि दो लाख से अधिक अनुपस्थित रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा रद्द होने के बाद कई छात्रों ने अन्य विकल्प चुन लिए या दोबारा तैयारी के लिए पर्याप्त समय नहीं मिलने के कारण परीक्षा नहीं दी।

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