नाम परिवर्तन पर सियासी संग्राम: ‘केरलम’ से ‘संभाजीनगर’ तक बदले शहरों की कहानी

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भारत में स्थानों के नाम बदलने का मुद्दा अब केवल प्रशासनिक औपचारिकता नहीं, बल्कि पहचान, इतिहास और राजनीति से जुड़ा बड़ा विमर्श बन चुका है।

शहरों, राज्यों, संस्थानों और रेलवे स्टेशनों तक—पिछले कुछ वर्षों में नाम परिवर्तन की रफ्तार तेज हुई है। कई बदलाव लागू हो चुके हैं, जबकि कई प्रस्ताव चर्चा में हैं।

‘केरल’ से ‘केरलम’ की पहल

Kerala विधानसभा ने राज्य का आधिकारिक नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव पारित किया। मलयालम भाषा में राज्य को पारंपरिक रूप से ‘केरलम’ ही कहा जाता है। 2023 और 2024 में पारित प्रस्तावों के जरिए केंद्र से संवैधानिक संशोधन का अनुरोध किया गया। इसे भाषाई पहचान को औपचारिक मान्यता देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

अदालत का रुख

नाम परिवर्तन से जुड़े विवाद अदालतों तक भी पहुंचे हैं। 2023 में Supreme Court of India ने ऐतिहासिक नामों को बदलने संबंधी एक याचिका खारिज करते हुए कहा था कि इतिहास को पूरी तरह मिटाने का प्रयास नए विवाद पैदा कर सकता है। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि अतीत को वर्तमान और भविष्य पर बोझ नहीं बनने देना चाहिए।

औपनिवेशिक नामों पर बहस

ब्रिटिश काल के कई अंग्रेज़ी नाम अब भी सरकारी दस्तावेज़ों और रेलवे स्टेशनों में प्रचलित हैं। उदाहरण के तौर पर Kannur (पूर्व में Cannanore) और Koyilandy (पूर्व में Quilandy) जैसे मामलों में स्थानीय उच्चारण और औपनिवेशिक वर्तनी के बीच असहमति लंबे समय से बनी हुई है। समर्थकों का तर्क है कि नामों का मानकीकरण प्रशासनिक स्पष्टता के लिए आवश्यक है।

हाल के चर्चित बदलाव

2024 में Port Blair का नाम बदलकर ‘श्री विजयपुरम’ कर दिया गया। इसे औपनिवेशिक अतीत से मुक्ति और स्वतंत्रता सेनानियों के सम्मान के रूप में पेश किया गया।

महाराष्ट्र में Aurangabad का नाम ‘छत्रपति संभाजीनगर’ और Osmanabad का नाम ‘धाराशिव’ किया गया। इन फैसलों पर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक बहस हुई।

देशभर में बदले गए प्रमुख नाम

Allahabad → प्रयागराज

Gurgaon → गुरुग्राम

Naya Raipur → अटल नगर

Mangalore → मंगलुरु

Bangalore → बेंगलुरु

इन बदलावों के पीछे अलग-अलग तर्क दिए जाते हैं—कहीं स्थानीय भाषा को प्राथमिकता, कहीं ऐतिहासिक विरासत की पुनर्स्थापना, तो कहीं किसी महान व्यक्तित्व को सम्मान देने की मंशा।

‘इंडिया’ बनाम ‘भारत’ बहस

जी20 से जुड़े एक आधिकारिक निमंत्रण में ‘President of Bharat’ लिखे जाने के बाद देश के नाम को लेकर भी चर्चा तेज हुई। हालांकि संवैधानिक रूप से ‘India’ और ‘Bharat’ दोनों नाम मान्य हैं, फिर भी इस मुद्दे ने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और परंपरा से जुड़ी बहस को नया आयाम दिया।

विशेषज्ञों का मानना है कि नाम परिवर्तन केवल शब्दों का बदलाव नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और राजनीतिक संदेश भी है। समर्थक इसे सांस्कृतिक पुनर्जागरण बताते हैं, जबकि आलोचक इसे संसाधनों की बर्बादी और सामाजिक ध्रुवीकरण से जोड़ते हैं। इतना तय है कि नाम बदलने का सिलसिला फिलहाल थमता नहीं दिख रहा और यह आगे भी सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा बना रहेगा।

पुराना नाम नया नाम
इलाहाबाद प्रयागराज
पोर्ट ब्लेयर श्री विजयपुरम
गुड़गांव गुरुग्राम
मैंगलोर मंगलुरु
औरंगाबाद छत्रपति संभाजी नगर
उस्मानाबाद धाराशिव

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