जैसे-जैसे दिल्ली-एनसीआर में तापमान गिर रहा है, हवा और जहरीली होती जा रही है।
रविवार सुबह कई इलाकों में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) ‘गंभीर’ स्तर पर पहुंच गया। आनंद विहार में AQI 430 और वजीरपुर में 406 दर्ज किया गया। घने स्मॉग की चादर छाने से दृश्यता घटी और लोगों को सांस लेने में परेशानी होने लगी है।
हर चार में से तीन परिवार प्रदूषण से प्रभावित
‘लोकल सर्किल्स’ के एक ऑनलाइन सर्वे के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर के करीब 75% परिवारों ने प्रदूषण के दुष्प्रभाव महसूस करने की बात कही है। गले में खराश, खांसी, आंखों में जलन और नींद की दिक्कतें आम हो गई हैं। डॉक्टरों का कहना है कि हवा में मौजूद जहरीले कण फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कहां कितना प्रदूषण
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, रविवार सुबह दिल्ली का औसत AQI 320 रहा। आनंद विहार (430), वजीरपुर (406), विवेक विहार (372), रोहिणी (359), पंजाबी बाग (352), जहांगीरपुरी (372) और चांदनी चौक (375) सबसे ज्यादा प्रदूषित इलाकों में रहे।
दिवाली के बाद चरम पर पहुंचा प्रदूषण
CPCB के विश्लेषण में पाया गया कि दिवाली के बाद पीएम 2.5 का स्तर 488 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर तक पहुंच गया — जो पिछले पांच वर्षों का सबसे अधिक स्तर है। त्योहार से पहले यह स्तर 156.6 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर था। दिवाली की रात और उसके अगले दिन प्रदूषण अपने चरम पर पहुंच गया।
पराली कम जली, फिर भी नहीं सुधरी हवा
पंजाब और हरियाणा में इस बार पराली जलाने की घटनाएं 77% तक घटी हैं, फिर भी दिल्ली की हवा साफ नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों के मुताबिक, स्थानीय प्रदूषण के स्रोत — जैसे वाहन धुआं, निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल और धीमी हवाएं — स्थिति को और बिगाड़ रहे हैं।
प्रशासन सतर्क, लोगों से सावधानी की अपील
दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के तहत निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों को निर्माण स्थलों और औद्योगिक क्षेत्रों में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। डॉक्टरों ने नागरिकों को एन-95 मास्क पहनने, घर से कम बाहर निकलने और बच्चों व बुजुर्गों को प्रदूषण से बचाने की सलाह दी है।
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