भारत अगले कुछ वर्षों में रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट समिति की बैठक में सरकार ने इस सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए 7,280 करोड़ रुपये की नई स्कीम को मंजूरी दी।
देश में लगेंगी 5 नई यूनिटें
स्कीम के तहत देश में पांच रेयर अर्थ मैग्नेट यूनिटें स्थापित की जाएंगी। इनसे हर साल करीब 6,000 टन मैग्नेट बनने का अनुमान है। रेयर अर्थ मैग्नेट इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस, डिफेंस, मेडिकल टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसी इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
चीन पर निर्भरता घटाने की तैयारी
भारत अभी रेयर अर्थ मैग्नेट के लिए लगभग पूरी तरह चीन पर निर्भर है। साल की शुरुआत में भारत को मैग्नेट सप्लाई रोकने के बाद चीन के रुख ने सरकार को इस सेक्टर में आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से कदम उठाने के लिए प्रेरित किया। आने वाले दो से तीन वर्षों में सभी यूनिटें स्थापित हो जाएंगी।
इंसेंटिव से बढ़ेगा निवेश
प्रत्येक यूनिट की क्षमता 1,200 टन होगी। अनुमान है कि 7,280 करोड़ रुपये के इंसेंटिव के जरिए इस सेक्टर में 21,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आएगा। परियोजना का संचालन भारी उद्योग मंत्रालय करेगा।
रेयर अर्थ कैसे बनते हैं?
रेयर अर्थ तत्व समुद्र तटीय रेत और पहाड़ी चट्टानों में पाए जाते हैं। तटीय क्षेत्र से मिलने वाले हल्के तत्व और पहाड़ी इलाकों से मिलने वाले भारी तत्व मिलकर शक्तिशाली मैग्नेट तैयार करते हैं। वैश्विक रेयर अर्थ भंडार का लगभग आधा हिस्सा चीन के पास है।
वैश्विक कंपनियों की दिलचस्पी
IREL के अलावा BHEL ने रेयर अर्थ ऑक्साइड की सप्लाई के लिए 20 अंतरराष्ट्रीय कंपनियों से संपर्क किया है। ऑस्ट्रेलिया की Lynas और Iluka तथा यूके की Rainbow जैसी कंपनियां भारत के साथ लंबी अवधि के समझौते में रुचि दिखा रही हैं।
रेल परियोजनाओं को भी मंजूरी
कैबिनेट ने गुजरात और महाराष्ट्र में 2,781 करोड़ रुपये की दो रेल परियोजनाओं को मंजूरी दी।
द्वारका–कानालुस रेल लाइन के दोहरीकरण से कनेक्टिविटी बेहतर होगी और कोयला, नमक, सीमेंट जैसे माल की ढुलाई तेज होगी।
बदलापुर–कर्जत तीसरी और चौथी लाइन से मुंबई महानगर क्षेत्र की कनेक्टिविटी सुधरेगी और दक्षिण भारत से संपर्क और मजबूत होगा।
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