यूरोप में हीटवेव का प्रकोप, फ्रांस-इटली में रेड अलर्ट; स्पेन-पुर्तगाल में रिकॉर्डतोड़ तापमान
दक्षिणी यूरोप और ब्रिटेन इस समय भीषण गर्मी की चपेट में हैं। सोमवार को स्पेन और पुर्तगाल में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया, वहीं फ्रांस और इटली में खतरनाक गर्मी को देखते हुए रेड अलर्ट जारी किया गया है।
मेडिटेरेनियन क्षेत्र में गर्मी का कहर
मेडिटेरेनियन सागर के किनारे बसे देशों में इस सीज़न की पहली गंभीर हीटवेव आई है। सरकारों ने लोगों को घरों में रहने, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की अपील की है।
फ्रांस की पर्यावरण मंत्री एग्नेस पनिये-रनाचे ने इसे “अभूतपूर्व स्थिति” बताते हुए कहा कि फ्रांस के 16 इलाकों में रेड अलर्ट घोषित किया गया है। पर्यटक क्षेत्रों में एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड को तैनात कर दिया गया है।
भीषण गर्मी और जंगलों में आग
- गर्मी और तेज़ हवाओं की वजह से फ्रांस, तुर्की और इटली में जंगलों में आग भड़क उठी है।
- इटली के नेपल्स के पास बाइआ डोमिज़िया में जंगल में आग लगने के बाद लोग समुद्र तट की ओर भागते देखे गए।
- इटली के 18 प्रमुख शहरों में, जिनमें रोम, मिलान और फ्लोरेंस शामिल हैं, आने वाले दिनों के लिए रेड अलर्ट लागू रहेगा।
- स्पेन के दक्षिणी हिस्सों में शनिवार को 46°C, और पुर्तगाल के मोरा शहर में रविवार को 46.6°C तापमान दर्ज किया गया — जो जून महीने के लिए एक नया रिकॉर्ड है।
- फ्रांस में मंगलवार और बुधवार को भी गर्मी के चरम पर रहने की आशंका है।
समुद्र भी पहुंचा रिकॉर्ड तापमान पर
गर्मी का असर सागर पर भी देखा जा रहा है।
फ्रांस के मौसम विभाग के अनुसार, मेडिटेरेनियन सागर की सतह का तापमान रविवार को 26.01°C तक पहुंच गया — जो जून के लिए एक रिकॉर्ड है।
असर और तैयारियां
फ्रांस में स्कूल सत्र इस सप्ताह समाप्त हो रहा है, जबकि स्पेन, इटली और पुर्तगाल में पहले ही छुट्टियां शुरू हो चुकी हैं। इन देशों में बच्चों के लिए समर कैंप्स आयोजित किए जा रहे हैं ताकि उन्हें गर्मी से राहत मिल सके।
क्रोएशिया और मोंटेनेग्रो के समुद्री क्षेत्रों में भी रेड अलर्ट जारी किया गया है।
सर्बिया के मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि देश के कई हिस्से गंभीर सूखे का सामना कर रहे हैं।
शहरी इलाकों में ज्यादा असर
हीटवेव का सर्वाधिक प्रभाव शहरी इलाकों में देखा जा रहा है, जहां गर्मी के कारण तापमान और ज्यादा बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति जलवायु परिवर्तन का संकेत भी है और आने वाले समय में इससे निपटने के लिए स्थायी समाधान तलाशने होंगे।
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