चीन के तियानजिन में आज से दो दिवसीय शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन की शुरुआत हो गई है।
इस मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन एक साथ नज़र आएंगे। दुनिया की निगाहें इस सम्मेलन पर टिकी हैं, खासकर ऐसे समय में जब ट्रंप प्रशासन की टैरिफ नीतियों ने वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ा दिया है और भारत-अमेरिका संबंधों में भी खटास आई है।
पीएम मोदी की अहम यात्रा
31 अगस्त और 1 सितंबर तक चलने वाले इस सम्मेलन में हिस्सा लेने पहुंचे मोदी सात साल से अधिक अंतराल के बाद चीन आए हैं। पिछली बार वे जून 2018 में एससीओ शिखर सम्मेलन में गए थे। इस यात्रा को भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत-चीन रिश्तों में नए संकेत
जून 2020 में गलवन घाटी झड़प के बाद से भारत-चीन संबंध तनावपूर्ण रहे हैं। हालांकि हाल के महीनों में दोनों देशों ने बातचीत के जरिए रिश्तों को सुधारने की कोशिशें तेज की हैं। रविवार को मोदी और चिनफिंग की द्विपक्षीय बैठक इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगी, जिसमें व्यापार और सीमा मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
पुतिन और यूक्रेन मसला
सम्मेलन के दौरान मोदी और पुतिन के बीच भी मुलाकात होगी। इसमें यूक्रेन संघर्ष अहम एजेंडा रहेगा। तियानजिन पहुंचने के बाद ही यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने मोदी को फोन कर युद्ध खत्म करने की अपील की। मोदी ने उन्हें आश्वस्त किया कि भारत शांति बहाल करने की हर कोशिश का समर्थन करता है।
चीन की उम्मीदें
भारत में चीनी राजदूत जू ने कहा कि पीएम मोदी की यात्रा दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा लाएगी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि एससीओ शिखर सम्मेलन भारत-चीन संबंधों को “नई गति” देगा।
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