ट्रंप की गाजा योजना को झटका: चीन ने ठुकराया प्रस्ताव, इटली ने जताई हिचक

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता वाली प्रस्तावित गाजा शांति परिषद को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मतभेद उभरकर सामने आ रहे हैं।

चीन ने इस परिषद में शामिल होने पर अनिच्छा जताते हुए साफ कहा है कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को संयुक्त राष्ट्र (UN) के ढांचे के तहत ही काम करना चाहिए, जबकि यह परिषद संयुक्त राष्ट्र से संबद्ध नहीं है।

चीन का साफ इनकार

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि चीन हमेशा से बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था और संयुक्त राष्ट्र आधारित अंतरराष्ट्रीय प्रणाली का समर्थक रहा है। उन्होंने ट्रंप के उस बयान पर प्रतिक्रिया दी जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा था कि भविष्य में गाजा शांति परिषद संयुक्त राष्ट्र की जगह ले सकती है।
गुओ ने स्पष्ट किया कि वैश्विक परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, चीन संयुक्त राष्ट्र के ढांचे और उसके नियमों का ही पालन करेगा।

इटली के संकेतों से बढ़ी असमंजस

इटली ने भी शांति परिषद से दूरी बनाने के संकेत दिए हैं। सरकारी सूत्रों के हवाले से इतालवी अखबार कोरिएरे डेला सेरा ने रिपोर्ट किया है कि परिषद में शामिल होना इटली के संविधान के प्रावधानों के खिलाफ हो सकता है।
इसके अलावा फ्रांस, नॉर्वे और स्वीडन ने भी ट्रंप की इस पहल में शामिल होने से इनकार कर दिया है।

भारत ने अभी फैसला नहीं लिया

भारत को भी गाजा शांति परिषद में शामिल होने का निमंत्रण मिला है, लेकिन सरकार ने अब तक इस पर कोई औपचारिक निर्णय नहीं लिया है।

इज़रायल और पाकिस्तान ने दी सहमति

इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दावोस रवाना होने से पहले शांति परिषद में शामिल होने की घोषणा की। हालांकि इससे पहले उनके कार्यालय ने परिषद की कार्यकारी समिति में तुर्किये को शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई थी।
वहीं पाकिस्तान ने भी ट्रंप की गाजा शांति परिषद में शामिल होने की घोषणा की है।

कितने देश हैं साथ?

अमेरिका का दावा है कि अब तक 20 देश गाजा शांति परिषद में शामिल होने के लिए सहमति जता चुके हैं। हालांकि परिषद की औपचारिक नियमावली अभी सार्वजनिक नहीं की गई है।

संयुक्त राष्ट्र की भूमिका पर सवाल

अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि ट्रंप की योजना इस परिषद को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तर्ज पर संचालित करने की है। कूटनीतिज्ञों का कहना है कि यदि ऐसा होता है, तो इससे वैश्विक मंच पर संयुक्त राष्ट्र के प्रभाव को कमजोर किया जा सकता है।

एक अरब डॉलर का योगदान!

अपुष्ट सूत्रों के अनुसार, शांति परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए करीब एक अरब डॉलर का योगदान देना पड़ सकता है। गुरुवार को स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) के इतर आयोजित एक कार्यक्रम में ट्रंप ने इस परिषद के गठन से जुड़े समारोह में हिस्सा लिया।

यह परिषद गाजा में युद्धविराम के बाद की स्थिति और पुनर्निर्माण योजना पर नजर रखेगी। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि उनकी शांति पहल के चलते ही गाजा में युद्धविराम संभव हो पाया है।

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