रथ यात्रा में अफरा-तफरी: श्रीगुंडिचा मंदिर के सामने भगदड़, कई लोग घायल

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पुरी में रथ यात्रा के दौरान भगदड़, श्रीगुंडिचा मंदिर के पास कई श्रद्धालु घायल

ओडिशा के पुरी में श्रीगुंडिचा मंदिर के बाहर रविवार तड़के रथ यात्रा के दौरान भगदड़ मच गई। भगवान जगन्नाथ के रथ को छूने के लिए जुटी भारी भीड़ के कारण यह हादसा हुआ। भगदड़ में कई श्रद्धालु घायल हो गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह घटना सुबह 4 से 5 बजे के बीच घटी जब श्रद्धालुओं की भीड़ अचानक बेकाबू हो गई।

घटनास्थल पर तत्काल एंबुलेंस उपलब्ध नहीं होने के कारण लोगों ने स्वयं घायलों को अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और दर्शन व्यवस्था सामान्य रूप से जारी है।

श्रद्धालुओं की भीड़, गर्मी और धक्का-मुक्की से बिगड़े हालात
शनिवार को भी रथ यात्रा के दौरान गर्मी और उमस के चलते 600 से अधिक श्रद्धालु बीमार पड़ गए थे। कई श्रद्धालु धक्का-मुक्की में घायल हुए और लगभग 200 लोग बेहोश हो गए। सभी को विभिन्न अस्पतालों में इलाज के लिए ले जाया गया।

कड़ी सुरक्षा और निगरानी के इंतज़ाम
वार्षिक रथ यात्रा के दौरान सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए हैं। ओडिशा पुलिस, सीएपीएफ और एनएसजी के करीब 10,000 जवानों को तैनात किया गया है। भीड़ नियंत्रण और निगरानी के लिए 275 से अधिक एआई-सक्षम सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। पुलिस महानिदेशक एस. खुरानिया के अनुसार, रथ यात्रा की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।

रथ पहुंच चुके हैं गुंडिचा मंदिर
शनिवार देर रात भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ के रथ श्रीगुंडिचा मंदिर पहुंच गए हैं। यह मंदिर मुख्य जगन्नाथ मंदिर से लगभग 2.6 किलोमीटर दूर स्थित है और इसे ‘मौसी का घर’ कहा जाता है। परंपरा के अनुसार, देवता यहां नौ दिन तक विश्राम करेंगे और 5 जुलाई को ‘बहुदा यात्रा’ के माध्यम से मुख्य मंदिर लौटेंगे।

परंपरागत अनुक्रम में आई बाधा
रथ यात्रा के दौरान शुक्रवार को भगवान बलभद्र का ‘तालध्वज’ रथ एक मोड़ पर फंस गया था, जिसके कारण अन्य दो रथों की गति भी रुक गई। पारंपरिक अनुक्रम के अनुसार सबसे पहले बलभद्र का रथ, फिर सुभद्रा का और अंत में जगन्नाथ का रथ खींचा जाता है।

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