भाजपा से निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर ने उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। इस याचिका पर शीर्ष अदालत आज सुनवाई करेगी।
इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने 19 जनवरी को सेंगर की 10 साल की सजा को निलंबित करने से इनकार कर दिया था। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि मुकदमे में हुई देरी आंशिक रूप से सेंगर की ओर से दायर की गई कई याचिकाओं के कारण हुई है, इसलिए सजा निलंबन का आधार नहीं बनता।
10 साल की सजा और जुर्माना
उन्नाव मामले में ट्रायल कोर्ट ने 13 मार्च 2020 को कुलदीप सिंह सेंगर को पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में 10 साल के कठोर कारावास और 10 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। अदालत ने कहा था कि परिवार के एकमात्र कमाने वाले की मौत के मामले में किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जा सकती।
गैर इरादतन हत्या में दोषी
अधीनस्थ अदालत ने सेंगर को हत्या का दोषी नहीं ठहराया था, लेकिन उसे गैर इरादतन हत्या के अपराध में दोषी मानते हुए अधिकतम सजा सुनाई थी।
हाई कोर्ट में लंबित हैं अपीलें
दुष्कर्म के मुख्य मामले में दिसंबर 2019 के फैसले को चुनौती देने वाली सेंगर की अपील हाई कोर्ट में लंबित है। इस मामले में उसे दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके अलावा पीड़िता के पिता की मौत से जुड़े मामले की अपील भी हाई कोर्ट में विचाराधीन है।
सजा निलंबन पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
बलात्कार मामले में दोषसिद्धि और सजा के खिलाफ अपील लंबित रहने के दौरान हाई कोर्ट ने 23 दिसंबर 2025 को सेंगर की सजा निलंबित कर दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 29 दिसंबर 2025 को इस निलंबन आदेश पर रोक लगा दी थी।
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