इजरायल में भी, फलस्तीन में भी… 471 दिन बाद घर लौटे वे और आंखों में बहने लगे खुशी के आंसू
"उम्मीद नहीं थी कि हम कभी उस कैद से आजाद होकर अपने घर वापस आ पाएंगे... अपनों से मिल पाएंगे, उन्हें गले लगा पाएंगे, पर आज हम आजाद हैं...हमारी आंखों में ये आंसू खुशी के हैं. इनका मोल हमसे ज्यादा कोई और नहीं समझ सकता है.'
हमास की कैद से रिहा…
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