तेजस्वी यादव का बड़ा बयान: चुनाव बहिष्कार खुला विकल्प, BJP ने कहा- हार का डर

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तेजस्वी यादव के चुनाव बहिष्कार संकेत पर सियासी संग्राम, जेडीयू-बीजेपी से लेकर कांग्रेस तक सभी की प्रतिक्रिया

राजद नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के “चुनाव बहिष्कार” को लेकर दिए गए बयान से बिहार की सियासत में घमासान मच गया है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनावों में “खुल्लमखुल्ला बेईमानी” की तैयारी है और वोटर लिस्ट से लाखों नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ऐसी स्थिति बनी रही तो महागठबंधन सभी दलों के साथ मिलकर चुनाव बहिष्कार पर गंभीरता से विचार करेगा।

तेजस्वी ने कहा, “जब सब तय कर ही लिया गया है—किसे कितनी सीटें देनी हैं, कौन जीतेगा—तो फिर चुनाव की जरूरत ही क्या है? जब जनता के वोट का महत्व नहीं रह गया, तो बहिष्कार भी एक विकल्प है।”

विपक्ष और सहयोगी दलों की प्रतिक्रियाएं
बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम ने कहा कि यदि बड़ी संख्या में वोटर लिस्ट से नाम काटे गए तो कांग्रेस सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करेगी। कांग्रेस प्रभारी कृष्ण अल्लावरू ने कहा, “सभी विकल्प खुले हैं, फैसला मिल-बैठकर लिया जाएगा।”

पप्पू यादव, निर्दलीय सांसद, ने कहा कि तेजस्वी का बयान अंतिम विकल्प के तौर पर देखा जाना चाहिए। उन्होंने संसद और सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा जताया लेकिन सभी रास्ते बंद होने पर साझा इस्तीफे का भी सुझाव दिया।

आरजेडी सांसद मनोज झा ने कहा, “अगर भारत का चुनाव आयोग बांग्लादेश के इलेक्शन कमीशन जैसा बर्ताव करेगा तो हमारे पास विकल्प नहीं रहेगा।” उन्होंने वोटर लिस्ट से बिहारियों को बाहर किए जाने की आशंका जताई।

सत्ताधारी दलों और विरोधियों का पलटवार
जेडीयू नेता केसी त्यागी ने सवाल उठाया कि क्या तेजस्वी सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले न्यायपालिका को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। 28 जुलाई को इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।

बीजेपी सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि तेजस्वी को जमीनी हकीकत का एहसास हो गया है और अब वे हार से पहले ही मैदान छोड़ने का बहाना बना रहे हैं। डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने कहा कि “जातिवाद और परिवारवाद” की राजनीति अब नहीं चलेगी।

एलजेपी सांसद शांभवी चौधरी ने कहा कि यह बयान चुनाव से पहले बहाना गढ़ने की कोशिश है, जैसा महाराष्ट्र चुनाव में भी देखा गया था। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने तेजस्वी के बयान को हार की स्वीकारोक्ति बताया और सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार करने की बात कही।

वोटर अधिकार और संवैधानिक चिंता
सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने कहा कि वोटरों के नाम काटना असंवैधानिक है और इस पर रोक लगनी चाहिए।

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