आसमान का शेर मिग-21 अब इतिहास में, 62 साल बाद सेवा से विदाई

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2 साल बाद मिग-21 ने भरी अंतिम उड़ान, गौरवशाली इतिहास को सलामी

भारतीय वायुसेना के सबसे ऐतिहासिक और जांबाज लड़ाकू विमानों में से एक मिग-21 ने शुक्रवार को अपनी आखिरी उड़ान भरी। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने टेल नंबर 2777 वाले मिग-21 को अंतिम बार उड़ाया और सुरक्षित लैंडिंग के साथ छह दशक लंबे सफर का समापन किया।

विदाई समारोह में वायुसेना परिवार गर्व और भावनाओं से भरा नजर आया। सूर्य किरण एरोबेटिक टीम की प्रस्तुति और पूर्व वायु सैनिकों की मौजूदगी ने इस क्षण को और भी ऐतिहासिक बना दिया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और तीनों सेनाओं के प्रमुख इस अवसर के गवाह बने।

गौरवशाली यात्रा

1963 में भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ मिग-21 चार युद्धों—1965, 1971, 1999 कारगिल और कई अभियानों—में दुश्मनों के लिए दहशत का कारण बना। “टाइप-77” के नाम से पहचाना जाने वाला यह विमान न केवल भारत की हवाई ताकत का आधार रहा बल्कि पायलटों को प्रशिक्षित करने का भी सबसे बड़ा मंच बना।

अनुशासन और साहस का प्रतीक

एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा—“मिग-21 सिर्फ एक विमान नहीं, बल्कि भारतीय वायुसेना के अनुशासन, समन्वय और साहस का प्रतीक है। दशकों तक इसने हर परिस्थिति में अपनी विश्वसनीयता साबित की।”

यादों में रहेगा मिग

पूर्व वायुसेना प्रमुख बीएस धनोआ ने कहा कि दुश्मन मिग-21 की ताकत से घबराते थे। कई पूर्व पायलटों ने इसे अपनी जिंदगी का अहम हिस्सा बताया। हालांकि तकनीकी सीमाओं और हादसों के कारण इसे धीरे-धीरे चरणबद्ध तरीके से रिटायर किया गया।

नए युग की शुरुआत

अब मिग-21 की जगह आधुनिक तेजस एलसीए, सुखोई-30 और राफेल भारतीय आसमान की सुरक्षा करेंगे। लेकिन वायुसेना की वीरता और शौर्य की कहानी में मिग-21 का नाम हमेशा सुनहरे अक्षरों में लिखा रहेगा।

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