फौजा सिंह का निधन: 114 वर्ष की उम्र में सड़क हादसे ने छीन ली ‘द टर्बन टॉर्नेडो’ की रफ्तार
दुनिया के सबसे उम्रदराज मैराथन धावक फौजा सिंह का सोमवार को पंजाब में एक सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। 114 वर्षीय इस दिग्गज एथलीट को जालंधर-पठानकोट हाईवे पर एक तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी, जिससे उन्हें सिर पर गंभीर चोट लगी। अस्पताल में भर्ती कराने के कुछ घंटों बाद शाम करीब 7:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
1 अप्रैल 1911 को जालंधर के ब्यास गांव में जन्मे फौजा सिंह ने साबित किया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। बेटे और पत्नी की मृत्यु के बाद जीवन में अर्थ की तलाश ने उन्हें दौड़ की ओर मोड़ा। 89 साल की उम्र में उन्होंने पेशेवर दौड़ना शुरू किया और 2000 में लंदन मैराथन में भाग लिया।
इसके बाद उन्होंने लंदन, टोरंटो और न्यूयॉर्क सहित कई अंतरराष्ट्रीय मैराथनों में हिस्सा लिया। 2011 में जब उन्होंने टोरंटो मैराथन पूरी की, तब उनकी उम्र 100 साल थी — और यहीं से उन्हें ‘द टर्बन टॉर्नेडो’ के नाम से पहचाना जाने लगा। उन्होंने अपनी आखिरी पेशेवर दौड़ 2013 में, 101 साल की उम्र में हांगकांग में पूरी की थी।
फौजा सिंह ओलंपिक टॉर्च रिले का भी हिस्सा रहे और डेविड बेकहम व मुहम्मद अली जैसे दिग्गजों के साथ एक प्रतिष्ठित विज्ञापन अभियान में नजर आए। वे न केवल खेल जगत के लिए, बल्कि एक सक्रिय, संयमी और प्रेरक जीवन के लिए वैश्विक प्रतीक बन चुके थे।
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा, “114 साल की उम्र में भी फौजा सिंह जी ने अपनी प्रतिबद्धता और ताकत से पीढ़ियों को प्रेरित किया। उनकी उपस्थिति हमेशा एक आंदोलन की तरह महसूस होती थी।”
अब जब वह नहीं रहे, उनकी कहानी दुनिया भर के उन लोगों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी जो मानते हैं कि नया आरंभ कभी भी किया जा सकता है — चाहे उम्र कुछ भी हो।
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