नेपाल में नया ठिकाना बनाने की तैयारी में था TMC का ‘पुष्पा’, STF ने बॉर्डर से दबोचा
पश्चिम बंगाल स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और दार्जिलिंग पुलिस ने रविवार को भारत-नेपाल सीमा के पास पानीटंकी बाजार से तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता जहांगीर खान को गिरफ्तार कर लिया। ‘पुष्पा’ के नाम से चर्चित जहांगीर पिछले करीब दो सप्ताह से फरार चल रहा था और उस पर हत्या, रंगदारी तथा चुनावी हिंसा समेत कई गंभीर आरोप दर्ज हैं।
एसटीएफ के अधिकारियों के मुताबिक, जहांगीर खान गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार अपने ठिकाने बदल रहा था। पहले वह फांसीदेवा के एक होटल में छिपा रहा और बाद में सीमा से सटे एक मकान में शरण ली। जांच एजेंसियों का दावा है कि उसने नेपाल में स्थायी तौर पर बसने की तैयारी भी शुरू कर दी थी।
सूत्रों के अनुसार, जहांगीर अपनी पत्नी और बेटे के साथ नेपाल में नया जीवन शुरू करना चाहता था। उसने अपने बेटे का दाखिला वहां के एक स्कूल में कराने की योजना बनाई थी। खुफिया अधिकारियों का कहना है कि वह कुछ समय के लिए नेपाल पहुंच भी गया था और काठमांडू में किराये का मकान लेकर रह रहा था।
बताया जा रहा है कि रविवार सुबह वह भारत-नेपाल सीमा के रास्ते वापस भारत लौटा। इसी दौरान पहले से निगरानी कर रही STF और दार्जिलिंग पुलिस की टीम ने उसे पानीटंकी बाजार इलाके से दबोच लिया।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तारी से बचने के लिए जहांगीर ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए थे, कई बार सिम कार्ड बदले और यहां तक कि अपना WhatsApp अकाउंट भी डिलीट कर दिया था। बावजूद इसके वह अपने करीबी सहयोगियों और परिवार के कुछ सदस्यों के संपर्क में बना रहा। पुलिस ने इन्हीं संपर्कों और उसकी गतिविधियों के पैटर्न का विश्लेषण कर उसका लोकेशन ट्रेस किया।
जांच अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तारी से बचने के लिए जहांगीर ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए थे, कई बार सिम कार्ड बदले और यहां तक कि अपना WhatsApp अकाउंट भी डिलीट कर दिया था। बावजूद इसके वह अपने करीबी सहयोगियों और परिवार के कुछ सदस्यों के संपर्क में बना रहा। पुलिस ने इन्हीं संपर्कों और उसकी गतिविधियों के पैटर्न का विश्लेषण कर उसका लोकेशन ट्रेस किया।
बंगाल STF ने बयान जारी कर कहा कि डायमंड हार्बर पुलिस जिले के फलता थाने में दर्ज कई मामलों में वांछित जहांगीर खान को रविवार दोपहर करीब 2:30 बजे खारीबाड़ी थाना क्षेत्र के पानीटंकी बाजार से गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तारी के बाद उसे फांसीदेवा थाने ले जाया गया, जहां सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। बाद में उसे स्थानीय अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए डायमंड हार्बर पुलिस जिले ले जाने की अनुमति मिल गई।
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