फ्रांस और स्पेन में बवाल जारी, नकाबपोश भीड़ का दुकानों पर हमला; अब तक 1,000 गिरफ्तार

1

फ्रांस से बेल्जियम तक सड़कों पर उतरे लाखों लोग, कई शहरों में हिंसा और आगजनी; यूरोप में हाई अलर्ट

फ्रांस समेत यूरोप के कई देशों में सरकार विरोधी प्रदर्शनों ने शनिवार को उग्र रूप ले लिया। फ्रांस में लाखों लोग विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे, लेकिन कई शहरों में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुईं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा। इस बीच बेल्जियम, इटली, अल्बानिया, स्पेन और पुर्तगाल में भी अलग-अलग मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन जारी रहे।

फ्रांस में पेरिस से करीब 120 किलोमीटर दूर ओर्लियांस से शुरू हुआ मार्च शुरुआती दौर में शांतिपूर्ण रहा, लेकिन शाम को हालात बिगड़ गए। प्रतिबंधों के बावजूद पेरिस में करीब 1.10 लाख और देशभर में लगभग 4.10 लाख लोगों ने प्रदर्शन किया।

मार्सेय, लियोन, क्लेरमोंट-फेरांड और स्ट्रासबर्ग में पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस छोड़ी। नीस और नांतेस में वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंकीं।

पेरिस और मार्सेय में पथराव, दुकानों को निशाना बनाने की कोशिश
रॉयटर्स के मुताबिक, पेरिस में रैली समाप्त होने के बाद 500 से अधिक हुडी पहने लोगों ने दंगा नियंत्रण पुलिस पर पथराव किया। मार्सेय में उपद्रवियों ने धातु की चादरों से सड़कें बंद कर दीं, कूड़ेदानों में आग लगाई और पुलिस पर पत्थर तथा बोतलें फेंकीं।

देर शाम तक कई इलाकों में तनाव बना रहा। कुछ लोगों ने आभूषणों की दो दुकानों में घुसने की कोशिश की। बोर्दो, लियोन और ग्रेनोबल में भी हिंसा की घटनाएं सामने आईं। हालांकि, पुलिस का कहना है कि पिछले सप्ताह के मुकाबले इस बार हिंसा कम हुई।

पेरिस के मध्य हिस्से में सुरक्षा व्यवस्था बेहद सख्त रही। कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों को नुकसान से बचाने के लिए लकड़ी के तख्ते लगाए। लूवरे, म्यूजे द’ओर्से और पेरिस ओपेरा जैसे प्रमुख सांस्कृतिक संस्थान बंद रहे, जबकि मेट्रो के 20 से अधिक स्टेशन भी बंद कर दिए गए।

प्रदर्शन के रूट पर विवाद, 135 लोगों की गिरफ्तारी
न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के मार्ग को लेकर आयोजकों और पुलिस के बीच विवाद हुआ। पुलिस ने अंतिम समय में मार्च को शहर के केंद्र से हटाकर दक्षिण-पूर्वी बाहरी इलाके की ओर ले जाने का निर्देश दिया। अधिकारियों ने आशंका जताई कि पुराने मार्ग पर दुकानों और संपत्तियों को नुकसान पहुंच सकता है। वामपंथी नेता जां-लुक मेलंशों ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे प्रदर्शनकारियों के बीच भ्रम पैदा हुआ।

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, हिंसा और लूटपाट रोकने के लिए फ्रांस के प्रमुख शहरों में करीब 70 हजार पुलिसकर्मियों और दंगा नियंत्रण बलों को तैनात किया गया। गृह मंत्री लोरां नूनेज ने बताया कि दोपहर तक 135 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका था।

तलाशी के दौरान पटाखे, गुलेल, धातु के छर्रे और हथियार के रूप में इस्तेमाल की जा सकने वाली अन्य वस्तुएं मिलीं। फ्रांस में भारतीय दूतावास ने भारतीय नागरिकों को सतर्क रहने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।

शिक्षा से शुरू हुआ आंदोलन, अब कई मुद्दों पर विरोध
फ्रांस में प्रदर्शन की शुरुआत शिक्षा व्यवस्था में सुधार, शिक्षकों की कमी और बढ़ती महंगाई के विरोध में हुई थी। धीरे-धीरे इसमें छात्र संगठनों, ट्रेड यूनियनों, वामपंथी दलों और नागरिक समूहों की भागीदारी बढ़ती गई। आंदोलन में अब कई अन्य मांगें भी शामिल हो गई हैं। येलो वेस्ट समूह ने 31 अक्टूबर को फिर प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।

बेल्जियम में पुलिस ने छोड़ी आंसू गैस
बेल्जियम में भी सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं। रॉयटर्स के अनुसार, भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस और काली मिर्च के स्प्रे का इस्तेमाल किया।

प्रदर्शन में शामिल युवा शिक्षा व्यवस्था में सुधार और बजट बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर खड़े स्कूटर और साइकिलों में आग लगाने तथा तोड़फोड़ करने की कोशिश की।

इटली में हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार ने मिलान में 500 सैनिकों और पांच हजार पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। रोम में भी प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा बढ़ाई गई है। पिछले सप्ताह हुई हिंसा के सिलसिले में पुलिस ने 45 लोगों को पकड़ा था, जिनमें 34 नाबालिग बताए गए हैं।

अल्बानिया में प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग
अल्बानिया की राजधानी तिराना में छात्र शिक्षा बजट बढ़ाने, फीस कम करने और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। प्रशासन ने स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, वाटर कैनन और आंसू गैस तैयार रखी है।

स्पेन में पेंशन, पुर्तगाल में सस्ते मकानों को लेकर प्रदर्शन
अल जजीरा के अनुसार, स्पेन की राजधानी मैड्रिड में करीब 25 हजार लोग सरकारी पेंशन योजना के समर्थन में सड़कों पर उतरे। गिरती जन्म दर और वेतन में धीमी वृद्धि के बीच पेंशन व्यवस्था पर बढ़ते वित्तीय बोझ को लेकर चिंता जताई जा रही है। इस साल पेंशन खर्च 16 अरब डॉलर से अधिक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की बात कही गई है। संभावित सरकारी नीतिगत बदलावों को लेकर भी लोगों में चिंता है।

दूसरी ओर, पुर्तगाल की राजधानी लिस्बन में प्रदर्शनकारियों ने किराये पर नियंत्रण और किफायती आवास उपलब्ध कराने की मांग की। बढ़ती आवास लागत और सस्ते घरों की कमी यहां विरोध के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं।

ऑनलाइन संदेशों के बाद चरमपंथी गतिविधियों पर नजर
यूरोप में विरोध प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा एजेंसियां संभावित चरमपंथी हमलों को लेकर भी सतर्क हैं। एएनआई के मुताबिक, स्पेन में कुछ ऑनलाइन संदेश सामने आए हैं, जिनमें कथित तौर पर चरमपंथियों को पुलिस और प्रदर्शनकारियों पर हमला करने के लिए उकसाया गया है।

पुर्तगाल की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली ने भी संभावित खतरों पर करीबी नजर रखने की बात कही है। हालांकि, इन संदेशों से किसी हमले की पुष्टि नहीं होती।

यूरोप के अलग-अलग देशों में शिक्षा, महंगाई, पेंशन, आवास और सरकारी नीतियों को लेकर जारी विरोध प्रदर्शनों ने प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बढ़ा दी है। फ्रांस में हिंसा की घटनाओं के बाद अन्य प्रमुख शहरों में भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।

Comments are closed.