अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बढ़ती ऊर्जा कीमतों को नियंत्रण में लाने के लिए बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने 100 साल पुराने जोन्स एक्ट में 60 दिनों के लिए अस्थायी छूट दी है, जिससे देश में तेल और अन्य जरूरी संसाधनों की आपूर्ति सुचारू रूप से हो सके।
वैश्विक तेल बाजार पर असर
ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के कारण वैश्विक तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे अमेरिका में पेट्रोल और डीजल की कीमतें 27% से अधिक बढ़ चुकी हैं। इस फैसले के तहत 60 दिनों तक विदेशी जहाज अमेरिका के एक बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह तक सामान ले जा सकेंगे, जिससे आपूर्ति में रुकावटें कम होंगी।
व्हाइट हाउस का बयान
व्हाइट हाउस ने इसे आपात कदम बताया। प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि यह कदम “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के दौरान बाजार में आई बाधाओं को कम करने के लिए उठाया गया है। इससे तेल, गैस, खाद और कोयला जैसी आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति आसानी से सुनिश्चित होगी।
जोन्स एक्ट क्या है?
जोन्स एक्ट 1920 में बनाया गया था, जिसका उद्देश्य अमेरिकी शिपिंग उद्योग को मजबूत करना है। इसके तहत अमेरिका के भीतर किसी भी बंदरगाह से दूसरे बंदरगाह तक सामान ले जाने के लिए अमेरिकी जहाजों का उपयोग अनिवार्य होता है। आलोचकों का कहना है कि यह नियम प्रतिस्पर्धा को कम करता है और संकट के समय परिवहन लागत बढ़ा देता है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और सप्लाई पर दबाव
ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही रोकने से वैश्विक तेल आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है। यह मार्ग दुनिया के लगभग 20% तेल परिवहन के लिए अहम माना जाता है, जिससे बाजार में आपूर्ति संकट और कीमतों में तेजी आई।
अन्य उपाय
ट्रंप प्रशासन ने तेल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA पर कुछ पाबंदियों में ढील दी है। इससे अमेरिकी कंपनियों को वहां से तेल खरीदने की अनुमति मिली है, जिससे बाजार में तेल की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
कुल मिलाकर, जोन्स एक्ट में 60 दिन की छूट और PDVSA पर ढील से अमेरिका का उद्देश्य घरेलू और वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बढ़ाकर कीमतों पर नियंत्रण रखना है।
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