ईरान में गहराते आर्थिक संकट के बीच जनता का विद्रोह और उग्र होता जा रहा है। एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों में अब तक कम से कम 35 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हालात के जल्द शांत होने के कोई संकेत नहीं हैं।
अमेरिका स्थित एक मानवाधिकार संगठन के अनुसार, एक सप्ताह से अधिक समय से चल रहे प्रदर्शनों के दौरान 1,200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है। मारे गए लोगों में 29 प्रदर्शनकारी, चार बच्चे और ईरानी सुरक्षा बलों के दो सदस्य शामिल हैं।
विरोध प्रदर्शन ईरान के 31 में से 27 प्रांतों तक फैल चुके हैं और 250 से अधिक स्थानों पर हिंसक झड़पें दर्ज की गई हैं। यह मानवाधिकार समूह अपनी रिपोर्टिंग के लिए ईरान के भीतर सक्रिय कार्यकर्ताओं के नेटवर्क पर निर्भर करता है और अतीत में भी देश में हुई अशांति के दौरान सटीक आंकड़े देता रहा है।
इस बीच यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के मामले में किस तरह या किस स्तर तक हस्तक्षेप करेंगे। हालांकि, ईरान को दी गई उनकी मिसाइल धमकी को तब और गंभीरता से देखा जा रहा है, जब अमेरिकी सेना ने ईरान के करीबी सहयोगी वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के लिए सैन्य कार्रवाई की है।
जनता क्यों उतरी सड़कों पर?
ईरान में मौजूदा विद्रोह की जड़ में तेजी से बढ़ती महंगाई और आर्थिक बदहाली है। विरोध की शुरुआत राजधानी तेहरान से हुई, जहां दुकानदार बढ़ती कीमतों और अस्थिर अर्थव्यवस्था के खिलाफ हड़ताल पर चले गए। इसके बाद आंदोलन देश के अन्य हिस्सों में फैल गया।
जैसे-जैसे ईरान के इस विद्रोह में मरने वालों की संख्या बढ़ रही है, इस बात की आशंका भी बढ़ रही है कि कहीं यहां भी अमेरिका हस्तक्षेप न कर दे. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि तेहरान “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को हिंसक रूप से मारता है,” तो अमेरिका “उनके बचाव में आएगा.” ट्रंप ने ईरान को साफ-साफ सैन्य हमले की चेतावनी दी थी, उन्होंने कहा था कि अमेरिका के मिसाइल लॉक एंड लोडेड हैं.
ईरानी मुद्रा रियाल की भारी गिरावट ने हालात और खराब कर दिए हैं। वर्तमान में 1 अमेरिकी डॉलर की कीमत लगभग 14 लाख रियाल तक पहुंच चुकी है। आर्थिक दबाव के चलते कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम लीडर के शासन के अंत और कुछ मामलों में राजशाही की बहाली की मांग भी उठाई है।
एक ईरानी महिला ने बताया कि पहले एक किलो चावल की कीमत 0.6 डॉलर थी, जो अब बढ़कर 2.5 डॉलर प्रति किलो हो गई है। यानी जो चावल पहले करीब 60 रुपये प्रति किलो मिलता था, वही अब 250 रुपये किलो तक बिक रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, 2022 के बाद यह ईरान का सबसे बड़ा जनआंदोलन है। करीब चार साल पहले 22 वर्षीय महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत के बाद हुए प्रदर्शनों के मुकाबले यह आंदोलन अभी उतना व्यापक नहीं है, लेकिन इसकी तीव्रता और भौगोलिक फैलाव लगातार बढ़ रहा है।
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