जब C90 विमान हादसे में गई माधवराव सिंधिया की जान, यूपी सरकार ने बाद में लिया बड़ा फैसला

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रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एंबुलेंस विमान चतरा के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

इस दर्दनाक हादसे में मरीज सहित कुल सात लोग सवार थे और शुरुआती जानकारी के अनुसार किसी के भी बचने की संभावना नहीं रही। घटना ने एक बार फिर छोटे चार्टर्ड विमानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि जिस मॉडल का यह विमान था, वह पहले भी गंभीर हादसों से जुड़ा रहा है।

पहले भी सुर्खियों में रहा यही मॉडल

प्राप्त जानकारी के अनुसार दुर्घटनाग्रस्त विमान Beechcraft C90 श्रेणी का था। इसी मॉडल से जुड़ा एक बड़ा हादसा साल 2001 में हुआ था, जब वरिष्ठ नेता Madhavrao Scindia का विमान उत्तर प्रदेश के मैनपुरी में क्रैश हो गया था। चुनावी कार्यक्रम के लिए जा रहे इस विमान में उड़ान के दौरान आग लग गई थी और उसमें सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई थी।

इसके अलावा 28 जून 2018 को मुंबई के घाटकोपर इलाके में इसी मॉडल का एक चार्टर्ड विमान टेस्ट फ्लाइट के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। जुहू एयरपोर्ट से उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद विमान आबादी वाले क्षेत्र में गिर पड़ा था। इस हादसे में दो पायलट, दो फ्लाइट इंजीनियर और एक राहगीर सहित पांच लोगों की जान गई थी।

यूपी सरकार से जुड़ा था एक विमान

घाटकोपर हादसे में शामिल विमान कभी उत्तर प्रदेश सरकार के बेड़े में शामिल था। प्रयागराज में एक पूर्व दुर्घटना के बाद राज्य सरकार ने उसे बेचने का निर्णय लिया था। बाद में वही विमान निजी कंपनी के पास चला गया और टेस्टिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हुआ।

Beechcraft C90 की खासियत

Beechcraft C90 एक ट्विन-इंजन टर्बोप्रॉप विमान है, जिसका इस्तेमाल आमतौर पर चार्टर्ड सेवाओं, कॉर्पोरेट यात्रा और एयर एंबुलेंस ऑपरेशन में किया जाता है। इसमें पायलट के अलावा आमतौर पर 5–6 यात्री बैठ सकते हैं। इसकी रेंज लगभग 1,500 किलोमीटर तक और अधिकतम गति करीब 450–500 किलोमीटर प्रति घंटा बताई जाती है।

हाल के वर्षों में भी घटनाएं

रिपोर्ट्स के अनुसार 2025 में भी इस मॉडल से जुड़े हादसे सामने आए थे। उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद में एक विमान आपात स्थिति का शिकार हुआ, हालांकि उसमें सवार लोग सुरक्षित रहे। वहीं अमेरिका के टेक्सास में इसी श्रेणी के विमान दुर्घटना में दो लोगों की मौत हुई थी। चतरा के पास हुआ ताजा हादसा जांच के दायरे में है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे विमानों के रखरखाव, तकनीकी निरीक्षण और संचालन मानकों की सख्त समीक्षा जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की त्रासदियों को रोका जा सके।

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