Iran में जारी युद्ध के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है। पूर्व सुप्रीम लीडर Ali Khamenei की मौत के बाद उनके बेटे Mojtaba Khamenei को देश का नया सुप्रीम लीडर नियुक्त कर दिया गया है।
हालांकि इस ऐलान के तुरंत बाद राजधानी Tehran में उनके खिलाफ विरोध की आवाजें भी सुनाई देने लगीं। सोशल मीडिया पर करीब 17 सेकंड का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ महिलाएं फारसी भाषा में “मोज्तबा की मौत हो” जैसे नारे लगाती हुई सुनाई दे रही हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो रात के समय किसी इमारत की खिड़की से रिकॉर्ड किया गया है। वीडियो में दूर से धार्मिक नारे भी सुनाई दे रहे हैं।
मोज्तबा खामेनेई बने नए सुप्रीम लीडर
ईरान में सर्वोच्च नेता का चयन करने वाली संस्था Assembly of Experts ने रविवार शाम घोषणा की कि Mojtaba Khamenei को उनके पिता Ali Khamenei का उत्तराधिकारी बनाया गया है।
बताया गया है कि 28 फरवरी को तेहरान पर हुए हमलों में अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद नेतृत्व को लेकर चल रही अटकलों के बीच मोज्तबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित किया गया।
56 वर्षीय मोज्तबा खामेनेई 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान के तीसरे सुप्रीम लीडर बने हैं।
अमेरिका की प्रतिक्रिया
Donald Trump ने इस नियुक्ति पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “हम देखेंगे कि आगे क्या होता है।” इससे पहले उन्होंने ABC News को दिए इंटरव्यू में कहा था कि अगर नए सुप्रीम लीडर को अमेरिका की मंजूरी नहीं मिलेगी, तो वह ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगा।
इस बीच Israel की ओर से भी चेतावनी दी गई है कि अली खामेनेई के उत्तराधिकारी के रूप में चुने जाने वाले किसी भी नेता को निशाना बनाया जा सकता है।
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध
मिडिल-ईस्ट में तनाव उस समय बढ़ गया जब United States और Israel ने 28 फरवरी को ईरान पर हमले किए। इन हमलों में अली खामेनेई सहित ईरान के कई शीर्ष अधिकारियों के मारे जाने की खबर सामने आई।
इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल हमले शुरू कर दिए।
रिपोर्टों के अनुसार इस संघर्ष में अब तक ईरान में 1,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि इजरायल में एक दर्जन से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर है। वहीं, इस युद्ध में कम से कम सात अमेरिकी सैनिकों की भी मौत हुई है।
ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu का कहना है कि ईरान से तत्काल खतरे की आशंका के कारण यह हमला किया गया। ट्रंप ने कहा कि अगर पहले हमला नहीं किया जाता, तो ईरान इजरायल और संभवतः अमेरिका को निशाना बना सकता था।
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