दिल्ली: यमुना का पानी कम हुआ, पर बाढ़ पीड़ित अब राहत शिविरों में बीमारियों से जूझ रहे

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दिल्ली में बारिश और बाढ़ का डबल अटैक, यमुना अब भी खतरे के निशान से ऊपर।

दिल्ली इन दिनों बारिश और यमुना की बाढ़ से दोहरी मार झेल रही है। शुक्रवार से नदी का जलस्तर धीरे-धीरे घटा है, लेकिन खतरा अभी भी बना हुआ है। शनिवार सुबह 6 बजे यमुना का स्तर 206.65 मीटर दर्ज किया गया, जबकि इसका खतरे का निशान 205.33 मीटर है। हथनीकुंड बैराज से 58 हजार से ज्यादा क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद निचले इलाकों में बाढ़ का संकट गहरा गया है।

मौसम विभाग का अलर्ट
शुक्रवार को दिल्ली-एनसीआर में थोड़ी राहत मिली, लेकिन मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक हल्की बारिश और गरज-चमक का अनुमान जताया है।

पानी-पानी इलाके और रेस्क्यू
यमुना बाजार, मजनू का टीला, गीता कॉलोनी, गढ़ी मांडू, कश्मीरी गेट और मयूर विहार जैसे कई इलाके डूबे हुए हैं। अब तक 14 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाया गया है।

राहत शिविरों में स्वास्थ्य संकट
बाढ़ पीड़ितों को राहत शिविरों में ठहराया गया है, लेकिन यहां बीमारियों की चुनौती खड़ी हो गई है। लोग बुखार, चकत्ते और फंगल इंफेक्शन से परेशान हैं। कश्मीरी गेट के सर्वोदय विद्यालय में बनाए गए शिविर में 300 से ज्यादा लोग रह रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन बच्चों और बुजुर्गों में खुजली, त्वचा पर जलन और हल्का बुखार के मामले लगातार सामने आ रहे हैं।

मंत्री का बयान
दिल्ली के जल एवं बाढ़ नियंत्रण मंत्री प्रवेश वर्मा ने दावा किया कि मौजूदा जलभराव यमुना के पानी से नहीं, बल्कि बारिश से हुआ है। उनके मुताबिक, ड्रेनेज सिस्टम बंद किया गया है ताकि यमुना का पानी सड़कों तक न पहुंचे।

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