जम्मू-कश्मीर में बारिश से हालात गंभीर: 5 दिन में 32 मौतें, बाढ़-भूस्खलन का कहर; 6,000 से ज्यादा तीर्थयात्री फंसे
जम्मू-कश्मीर में लगातार पांचवें दिन भी मूसलाधार बारिश ने तबाही मचाई। घाटी की प्रमुख नदियां उफान पर हैं और कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। पिछले पांच दिनों में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से 32 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई लोग अब भी लापता हैं। खराब मौसम के कारण अमरनाथ, वैष्णो देवी और शिवखोड़ी यात्राएं रोक दी गई हैं तथा 6,000 से अधिक तीर्थयात्री अलग-अलग स्थानों पर फंसे हुए हैं।
पंपोर में गुरुवार रात झेलम नदी का जलस्तर 5.03 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से ऊपर है। श्रीनगर के राम मुंशी बाग में भी झेलम बाढ़ घोषणा स्तर पार कर गई, जबकि अनंतनाग के संगम में नदी का जलस्तर खतरे के बेहद करीब पहुंच गया। प्रशासन ने निचले इलाकों में सतर्कता बढ़ा दी है।
बारामुला जिले में बादल फटने के बाद आई अचानक बाढ़ से कई मकानों को नुकसान पहुंचा। जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग को दिन में एकतरफा खोलकर फंसे हल्के वाहनों को निकाला गया, लेकिन ऊधमपुर के देवाल समरोली में देर शाम दोबारा भूस्खलन होने से हाईवे फिर बंद करना पड़ा। सड़क धंसने और भूस्खलन के कारण 24 से अधिक अंतर-जिला सड़कें भी बंद हैं।
कठुआ में सेवा और रावी नदियों के बढ़ते जलस्तर को लेकर प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। लगातार खराब मौसम को देखते हुए कश्मीर विश्वविद्यालय ने 24 और 25 जुलाई की सभी परीक्षाएं स्थगित कर दी हैं। वहीं, सोनमर्ग के थजीवास पर्यटन क्षेत्र को अगले दो दिनों के लिए बंद कर दिया गया है और पर्यटकों को अरु व बेताब घाटी की यात्रा फिलहाल टालने की सलाह दी गई है।
राहत और बचाव अभियान भी लगातार जारी है। पुंछ के सुरनकोट में बाढ़ में लापता 25 वर्षीय खालिदा कौसर का शव बरामद हुआ है, जबकि पुंछ और राजौरी में सात अन्य लापता लोगों की तलाश की जा रही है।
लगातार बिगड़ते मौसम के चलते श्री अमरनाथ, माता वैष्णो देवी और शिवखोड़ी की यात्राएं फिलहाल स्थगित हैं। जम्मू, कठुआ, सांबा, ऊधमपुर, रामबन और बनिहाल समेत विभिन्न स्थानों पर 6,000 से अधिक तीर्थयात्री रुके हुए हैं। मौसम विभाग ने शुक्रवार को भी जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की आशंका जताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
Comments are closed.