अनिल मेनन को NASA ने अंतरिक्ष स्टेशन मिशन के लिए किया नामित, भारतीय मूल के वैज्ञानिक की बड़ी उपलब्धि

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अनिल मेनन को NASA ने अंतरिक्ष मिशन के लिए किया नामित, शुभांशु शुक्ला ISS पर कर रहे अहम शोध

भारतीय मूल के अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन को नासा ने उनके पहले अंतरिक्ष मिशन के लिए नियुक्त किया है। नासा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, मेनन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए 2026 में रवाना होंगे, जहां वह ‘एक्सपीडिशन 75’ मिशन में फ्लाइट इंजीनियर के रूप में शामिल होंगे।

जून 2026 में होगा प्रक्षेपण

अनिल मेनन जून 2026 में ‘सोयुज एमएस-29’ अंतरिक्ष यान के जरिए कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से रवाना होंगे। उनके साथ रोस्कोस्मोस के दो अनुभवी अंतरिक्ष यात्री—प्योत्र डबरोव और अन्ना किकिना भी इस मिशन का हिस्सा होंगे। तीनों करीब आठ महीने तक अंतरिक्ष स्टेशन पर वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी प्रयोगों में भाग लेंगे।

ISS पर मांसपेशी शोध में जुटे शुभांशु शुक्ला

इस बीच, भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर पहले से मौजूद हैं और एक्सिओम-4 मिशन के तहत मांसपेशियों, पाचन तंत्र और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी रिसर्च कर रहे हैं। उनके प्रयोगों का उद्देश्य यह समझना है कि गुरुत्वाकर्षण रहित वातावरण मांसपेशियों की कार्यप्रणाली को कैसे प्रभावित करता है।

शोध से मिल सकती है धरती पर भी चिकित्सा मदद

शोधकर्ताओं का मानना है कि अंतरिक्ष में मांसपेशियों की कार्यक्षमता में आई गिरावट को समझने से न केवल अंतरिक्ष यात्रियों को लंबी उड़ानों में फायदा होगा, बल्कि इससे बुजुर्गों में होने वाली मांसपेशी दुर्बलता जैसी समस्याओं के इलाज में भी मदद मिल सकती है।

अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण की कमी बनती है कमजोरी की वजह

गौरतलब है कि अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न होने के कारण शरीर पर भार नहीं पड़ता, जिससे मांसपेशियों का उपयोग कम हो जाता है और वे धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं। शुभांशु शुक्ला की रिसर्च का मकसद इसी प्रक्रिया को समझकर इसके प्रभावों को कम करने के उपाय खोजना है।

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