एशिया, अफ्रीका और यूरोप में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी, 12 देशों में 790 मिलियन लोग चपेट में; संयुक्त राष्ट्र ने कहा ‘स्थिति गंभीर’
जून 2025 बना 12 देशों का सबसे गर्म महीना, एशिया, यूरोप और अफ्रीका में 790 मिलियन लोग प्रभावित; UN ने जताई गहरी चिंता
जलवायु संकट अब आंकड़ों में नहीं, ज़मीनी हकीकत में झलक रहा है। जून 2025 का महीना दुनियाभर के कम से कम 12 देशों के लिए अब तक का सबसे गर्म दर्ज किया गया, जबकि 26 अन्य देशों में भी तापमान ने रिकॉर्ड तोड़ दिए। यूरोप, एशिया और अफ्रीका के 790 मिलियन (79 करोड़) लोग असामान्य लू और तापमान वृद्धि से सीधे प्रभावित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र ने इसे “गंभीर वैश्विक आपातस्थिति” करार दिया है।
यूरोप: गर्मी ने तोड़े दशकों पुराने रिकॉर्ड
पश्चिमी और दक्षिणी यूरोप में लू का असर सबसे अधिक रहा।
बेल्जियम, फ्रांस, नीदरलैंड, स्विट्ज़रलैंड और इटली में जून के औसत से 3°C तक अधिक तापमान दर्ज किया गया।
बाल्कन देशों में गर्मी ने फसलों और बिजली व्यवस्था पर गहरा असर डाला।
एशिया: जापान से लेकर मध्य एशिया तक ‘हीट इमरजेंसी’
जापान: 1898 के बाद सबसे गर्म जून। 14 शहरों में तापमान ने ऐतिहासिक स्तर पार किए। समुद्री सतह भी सामान्य से 1.2°C गर्म रही।
चीन: 102 मौसम केंद्रों ने जून के लिए अब तक के सबसे अधिक तापमान दर्ज किए। कई स्थानों पर पारा 40°C के पार गया।
दक्षिण और उत्तर कोरिया: औसत तापमान सामान्य से 2°C अधिक।
पाकिस्तान, ताजिकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान, उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान में अप्रैल से जून तक का समय अब तक का सबसे गर्म वसंत रहा।
अफ्रीका: गर्मी से शिक्षा और जीवन प्रभावित
दक्षिण सूडान: औसत तापमान में 2.1°C की असामान्य वृद्धि।
स्कूलों में बच्चे बेहोश होने लगे, सरकार ने कई स्थानों पर शिक्षण संस्थान बंद किए।
नाइजीरिया, इथियोपिया, कांगो समेत अन्य देशों में भीषण गर्मी से कृषि और जल संकट गहरा गया।
WMO (विश्व मौसम विज्ञान संगठन) ने चेताया कि अफ्रीका में यह गर्मी खाद्य असुरक्षा, पलायन और सामाजिक अस्थिरता को बढ़ा सकती है।
संयुक्त राष्ट्र का सख्त संदेश
UN एजेंसियों ने चेताया है कि यह सिर्फ एक ‘गर्मी की लहर’ नहीं, बल्कि जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट और खतरनाक संकेत है। समुद्र का बढ़ता तापमान, बढ़ते ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन और लगातार रिकॉर्ड टूटते तापमान — ये सभी एक गहरे संकट की ओर इशारा कर रहे हैं।
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