मैसेजिंग ऐप टेलीग्राम के अरबपति फाउंडर पावेल ड्यूरोव ने स्पर्म डोनेशन और विरासत को लेकर बड़ा एलान किया है।
ड्यूरोव ने कहा है कि जो महिलाएं उनके डोनेट किए गए स्पर्म का इस्तेमाल कर IVF के जरिए बच्चा पैदा करना चाहती हैं, उनका पूरा इलाज खर्च वह खुद उठाएंगे। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया है कि उनके सभी बायोलॉजिकल बच्चों को उनकी 17 अरब डॉलर की संपत्ति में बराबर हिस्सा मिलेगा, बशर्ते वे उनसे DNA के जरिए जैविक संबंध साबित कर सकें। यह खुलासा वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में हुआ है।
41 वर्षीय रूसी मूल के टेक एंटरप्रेन्योर ड्यूरोव ने जुलाई 2024 में बताया था कि स्पर्म डोनेशन के जरिए उनके 12 से अधिक देशों में 100 से ज्यादा बायोलॉजिकल बच्चे हैं। उन्होंने करीब 2010 में स्पर्म डोनेट करना शुरू किया, शुरुआत में एक दोस्त की मदद के लिए। इसके बाद वह मॉस्को की AltraVita फर्टिलिटी क्लिनिक में गुमनाम रूप से स्पर्म डोनेशन करने लगे।
फर्टिलिटी क्लिनिक का विवादित कैंपेन
रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 की गर्मियों में AltraVita क्लिनिक ने एक अनोखा मार्केटिंग कैंपेन चलाया। इसमें ड्यूरोव के स्पर्म को ‘हाई जेनेटिक कम्पैटिबिलिटी’ वाला बताया गया और 37 साल से कम उम्र की महिलाओं को मुफ्त IVF की पेशकश की गई।
क्लिनिक के एक पूर्व डॉक्टर ने WSJ को बताया कि कानूनी जटिलताओं से बचने के लिए प्रतिभागियों का अविवाहित होना जरूरी था। उन्होंने कहा कि इच्छुक महिलाएं आमतौर पर “पढ़ी-लिखी और बेहद स्वस्थ” थीं। क्लिनिक की वेबसाइट पर ड्यूरोव की तस्वीर और टेलीग्राम लोगो वाला बैनर लगाया गया था, जिसमें उनके स्पर्म को “बहुत ज्यादा डिमांड में” बताया गया।
DNA साबित करने पर मिलेगी अरबों की विरासत
ड्यूरोव ने एक फ्रेंच मैगजीन को दिए इंटरव्यू में कहा कि उनके सभी बायोलॉजिकल बच्चों को समान रूप से विरासत में हिस्सा मिलेगा।
अक्टूबर 2024 में लेक्स फ्रिडमैन पॉडकास्ट पर उन्होंने कहा,
“अगर वे मेरे साथ अपना शेयर्ड DNA साबित कर पाते हैं, तो शायद 30 साल बाद, मेरे जाने के बाद, उन्हें मेरी संपत्ति पर अधिकार होगा।”
फोर्ब्स के मुताबिक, ड्यूरोव की कुल संपत्ति करीब 17 बिलियन डॉलर है। इसका बड़ा हिस्सा टेलीग्राम से जुड़ा है, जिसे वह भविष्य में एक नॉन-प्रॉफिट फाउंडेशन को सौंपने की योजना बना रहे हैं। इसके अलावा, उनके पास 2013 में खरीदे गए बिटकॉइन की भी एक अज्ञात मात्रा है।
ड्यूरोव ने बताया कि इस घोषणा के बाद उन्हें खुद को उनका बच्चा बताने वाले सैकड़ों मैसेज मिले। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपना DNA ओपन-सोर्स करने पर विचार कर रहे हैं, ताकि उनके जैविक बच्चे एक-दूसरे को पहचान सकें।
स्पर्म डोनेशन के पीछे ड्यूरोव की दलील
ड्यूरोव का कहना है कि उन्होंने यह कदम दुनिया भर में घटते स्पर्म काउंट और पुरुषों में बढ़ती बांझपन की समस्या को देखते हुए उठाया।
उन्होंने 2024 में टेलीग्राम पर लिखा था,
“स्वस्थ स्पर्म की कमी अब एक वैश्विक समस्या बनती जा रही है और मुझे गर्व है कि मैं इसे कम करने में योगदान दे सका।”
Comments are closed.