बिहार राजस्व सेवा के अधिकारी सोमवार से सामूहिक अवकाश पर जाने का ऐलान कर चुके हैं।
राजस्व सेवा संघ ने कहा है कि यह कदम लंबित मांगों और संवर्ग से जुड़े पदस्थापन विवाद को लेकर उठाया गया है। संघ ने इस फैसले की जानकारी विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल को लिखित रूप से दे दी है। संघ का कहना है कि राजस्व सेवा अधिकारियों के समर्थन में राजस्व कर्मचारी भी सामूहिक अवकाश पर रह सकते हैं। ऐसे में भूमि से जुड़े प्रशासनिक कामकाज के प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
संघ ने आरोप लगाया है कि उनके संवर्ग के लिए स्वीकृत पदों पर लगातार बिहार प्रशासनिक सेवा (BAS) के अधिकारियों की तैनाती की जा रही है, जिससे राजस्व सेवा अधिकारियों के पदोन्नति और तैनाती के अवसर सीमित हो रहे हैं। संघ के अनुसार, अंचलाधिकारी के बाद के अहम पद डीसीएलआर (उप समाहर्ता भूमि सुधार) पर भी राजस्व सेवा अधिकारियों की तैनाती नहीं हो रही है। जबकि पटना हाई कोर्ट ने जून 2025 में स्पष्ट आदेश दिया था कि इन पदों पर बिहार राजस्व सेवा के अधिकारियों को नियुक्त किया जाए।
संघ का आरोप है कि अदालत के आदेश के बावजूद सरकार ने अब तक इसे लागू नहीं किया है। यह मामला अभी भी पटना हाई कोर्ट में विचाराधीन है। इसी बीच राज्य सरकार ने राजस्व सेवा अधिकारियों के लिए अनुमंडल राजस्व अधिकारी का नया पद सृजित किया है। संघ का कहना है कि यह पद सृजन उनकी मूल मांगों का समाधान नहीं है और इसे वे स्वीकार नहीं करते।
राजस्व सेवा संघ ने साफ किया है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
Comments are closed.