चारधाम यात्रा अपडेट: अप्रैल में बसों की लॉटरी, जानें कब से शुरू होगा दर्शन

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चारधाम यात्रा को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। यात्रा के दौरान बसों के संचालन के लिए संयुक्त रोटेशन यातायात व्यवस्था समिति अप्रैल के पहले सप्ताह में बसों की लॉटरी निकालेगी।

लॉटरी में निकले नंबरों के आधार पर ही बसों को यात्रा मार्ग पर भेजा जाता है। इस वर्ष भी तय व्यवस्था के तहत 60 प्रतिशत बसें चारधाम यात्रा रूट पर चलेंगी, जबकि 40 प्रतिशत बसें स्थानीय मार्गों पर संचालित की जाएंगी, ताकि स्थानीय लोगों को किसी तरह की परेशानी न हो।

चारधाम यात्रा के दौरान यात्रियों को धामों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी 10 परिवहन कंपनियों से बने संयुक्त रोटेशन के पास रहती है। हरिद्वार और ऋषिकेश से सबसे अधिक बसें यात्रा मार्ग पर भेजी जाती हैं। इस वर्ष 19 अप्रैल को गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ यात्रा की शुरुआत होगी। इसके बाद 22 अप्रैल को केदारनाथ और 23 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे।

संयुक्त रोटेशन के अध्यक्ष भास्करानंद भारद्वाज के अनुसार, अप्रैल के पहले सप्ताह में बसों की लॉटरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। उन्होंने बताया कि संयुक्त रोटेशन के पास इस समय 2200 से अधिक बसें हैं, जिनमें से 60 प्रतिशत बसें यात्रा रूट पर और 40 प्रतिशत बसें स्थानीय रूट पर चलेंगी।

संयुक्त रोटेशन में शामिल परिवहन कंपनियां
संयुक्त रोटेशन में जीएमओयू, टीजीएमओ, यातायात, सीमांत सहकारी संघ, गढ़वाल मंडल कांट्रैक्ट कैरिज, रूपकुंड पर्यटन विकास संघ, दून वैली कांट्रैक्ट कैरिज, गढ़वाल मंडल बहुद्देश्यीय एंड यूजर्स रामनगर और हरिद्वार कांट्रैक्ट कैरिज जैसी परिवहन कंपनियां शामिल हैं।

1971 में हुई थी संयुक्त रोटेशन की शुरुआत
संयुक्त रोटेशन की स्थापना वर्ष 1971 में की गई थी। तब से अधिकतर वर्षों में चारधाम यात्रा के दौरान इसी व्यवस्था के तहत बसों का संचालन होता रहा है। हालांकि 1998 में संयुक्त रोटेशन का गठन नहीं हो पाया था। वहीं 2013 में भी कुछ कंपनियों के अलग हो जाने से व्यवस्था प्रभावित हुई थी और बड़ी संख्या में पहुंचे यात्रियों के कारण प्रशासन के लिए व्यवस्थाएं संभालना चुनौतीपूर्ण हो गया था।

जून 2013 में आई आपदा के कारण चारधाम यात्रा भी प्रभावित हुई थी और कुछ समय के लिए इसे रोकना पड़ा था। शुरुआत में संयुक्त रोटेशन में केवल तीन परिवहन कंपनियां—जीएमओ, टीजीएमओ और यातायात—शामिल थीं और उनके पास महज 103 बसें थीं। अब समय के साथ बसों की संख्या बढ़कर करीब 2200 तक पहुंच गई है।

बढ़ती प्रतिस्पर्धा बनी चुनौती
समय के साथ स्थानीय परिवहन कंपनियों के सामने नई चुनौतियां भी सामने आई हैं। अब बाहरी राज्यों के व्यावसायिक वाहन भी यात्रियों को चारधाम तक लाते हैं, वहीं कई श्रद्धालु निजी वाहनों से भी यात्रा पर निकलते हैं। इससे स्थानीय परिवहन कारोबारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।

ऋषिकेश में परिवहन कारोबार काफी हद तक मई और जून में होने वाली चारधाम यात्रा पर निर्भर करता है। परिवहन कंपनियां लंबे समय से अवैध रूप से चलने वाले डग्गामार वाहनों पर रोक लगाने की मांग करती रही हैं और हर बैठकों में यह मुद्दा उठाया जाता रहा है।

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