बिहार की सियासत में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधान परिषद (MLC) सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।
राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद नियमों के तहत उन्हें 14 दिनों के भीतर यह पद छोड़ना अनिवार्य था, जिसकी समयसीमा पूरी होने से पहले उन्होंने इस्तीफा सौंप दिया। अब अटकलें तेज हैं कि राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से भी हट सकते हैं। अगर ऐसा होता है, तो राज्य में नए नेतृत्व के साथ सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हो सकती है और सत्ता समीकरण बदल सकते हैं।
बिहार में बदलते राजनीतिक संकेत
2005 से अब तक एनडीए सरकार में बीजेपी सहयोगी की भूमिका में रही है, जबकि मुख्यमंत्री पद जेडीयू के पास रहा। मौजूदा हालात में पहली बार बीजेपी के नेतृत्व संभालने की संभावना जताई जा रही है, जिससे राज्य की राजनीति में नया अध्याय शुरू हो सकता है।
नीतीश कुमार का राज्यसभा कार्यकाल 10 अप्रैल से शुरू होना है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार गठन और नेतृत्व परिवर्तन को लेकर गतिविधियां और तेज होने की उम्मीद है।
सीएम पद के दावेदार
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री पद की रेस में सबसे आगे माना जा रहा है। वे बीजेपी विधायक दल के नेता हैं और कुशवाहा समुदाय से आते हैं, जो राज्य की राजनीति में अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय का नाम भी चर्चा में है। वे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं और संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं।
हालांकि, बीजेपी और जेडीयू की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन मौजूदा घटनाक्रम के बीच बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।
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