केंद्र सरकार ने 16 अप्रैल, 2026 से संसद का तीन दिवसीय विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें चुनावी ढांचे और प्रतिनिधित्व प्रणाली में बड़े बदलाव से जुड़े तीन अहम विधेयक पेश किए जाने हैं।
इनमें संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन बिल 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल शामिल हैं। इन प्रस्तावों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं।
विपक्षी दलों का आरोप है कि महिलाओं के आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रावधानों के कारण दक्षिणी राज्यों के प्रतिनिधित्व पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था सभी राज्यों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गई है।
The Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित परिसीमन सिर्फ 2011 की जनगणना पर आधारित नहीं होगा। इसके बजाय एक नया फॉर्मूला तैयार किया गया है, जिसमें सभी राज्यों की लोकसभा सीटों में आनुपातिक रूप से बढ़ोतरी का प्रस्ताव है—कुछ मामलों में यह बढ़ोतरी 50% तक हो सकती है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस मॉडल में हर राज्य को 2011 की जनगणना के आधार पर मिलने वाले संभावित प्रतिनिधित्व से भी अधिक सीटें मिलेंगी। उदाहरण के तौर पर, Tamil Nadu की लोकसभा सीटें 39 से बढ़कर 59 तक पहुंच सकती हैं, जबकि 2011 के आंकड़ों के आधार पर यह संख्या लगभग 49 होती।
प्रस्तावित आंकड़ों के मुताबिक बड़े राज्यों में सीटों का संभावित विस्तार इस प्रकार हो सकता है:
Uttar Pradesh: 80 से 120
Maharashtra: 48 से 72
West Bengal: 42 से 63
Bihar: 40 से 60
Madhya Pradesh: 29 से 44
Karnataka: 28 से 42
Gujarat: 26 से 39
Andhra Pradesh: 25 से 38
Rajasthan: 25 से 38
Odisha: 21 से 32
Kerala: 20 से 30
रिपोर्ट में यह भी संकेत है कि अगर परिसीमन केवल 2011 की जनगणना पर आधारित होता, तो दक्षिणी राज्यों का प्रतिनिधित्व हिंदी भाषी राज्यों के मुकाबले घट सकता था। इसी आशंका को ध्यान में रखते हुए नया फॉर्मूला तैयार किया गया है।
प्रस्ताव के तहत लोकसभा सीटों की अधिकतम सीमा 850 तक बढ़ाने की संभावना जताई गई है, जबकि वर्तमान में यह सीमा 550 है और वास्तविक संख्या 543 है।
इस बीच विपक्षी दलों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन का विरोध करेंगे। Rahul Gandhi ने इसे “राष्ट्र-विरोधी” कदम बताते हुए मांग की है कि सरकार पहले मौजूदा 543 सीटों के आधार पर महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करे।
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