संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने ईरान में बिगड़ते हालात को लेकर गंभीर चिंता जताई है।
उनका कहना है कि अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़े तनाव के बाद देश में सख्ती और बढ़ गई है। इस दौरान कम से कम 21 लोगों को फांसी दी गई है, जबकि 4000 से ज्यादा लोगों को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया है। तुर्क के मुताबिक, फांसी पाए लोगों में कुछ जनवरी में हुए विरोध प्रदर्शनों से जुड़े थे, जबकि अन्य पर विपक्षी संगठनों से संबंध या जासूसी के आरोप लगाए गए। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में नागरिक अधिकारों का व्यापक उल्लंघन हो रहा है।
UN की अपील
वोल्कर तुर्क ने ईरानी सरकार से फांसी की सजा पर रोक लगाने और निष्पक्ष व पारदर्शी न्यायिक प्रक्रिया सुनिश्चित करने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा कि जिन लोगों को बिना पर्याप्त सबूत के हिरासत में लिया गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाना चाहिए।
रिपोर्ट में जबरन गायब करने, हिरासत में यातना और दबाव में कबूलनामे कराने जैसे गंभीर आरोपों का भी जिक्र किया गया है।
विरोध प्रदर्शनों के बाद सख्ती
जनवरी में हुए सरकार विरोधी प्रदर्शनों को हाल के वर्षों का सबसे बड़ा आंदोलन बताया जा रहा है। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि मौजूदा तनाव के बीच भी विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है। हालांकि, ईरान इन आरोपों को पहले ही खारिज कर चुका है और इन्हें राजनीतिक करार देता रहा है।
अल्पसंख्यकों और कार्यकर्ताओं पर असर
रिपोर्ट के अनुसार, धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों को ज्यादा निशाना बनाया जा रहा है। कई लोगों को अज्ञात स्थानों पर ले जाने की भी बात सामने आई है।
मानवाधिकार वकील नसरीन सोतूदेह और नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नरगिस मोहम्मदी को लेकर भी चिंता जताई गई है।
जेलों में हिंसा के आरोप
तुर्क के अनुसार, चाबहार जेल में विरोध के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में कम से कम 5 लोगों की मौत हो गई और 21 घायल हुए। वहीं एक अन्य जेल में हिरासत के दौरान दो कैदियों की मौत की खबर है, जिनमें यातना के संकेत मिले हैं।
कुल मिलाकर, ईरान की स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ रही है और मानवाधिकारों के मुद्दे पर दबाव भी तेज होता दिख रहा है।
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