LPG छोड़ कोयला-इंडक्शन अपना रहे होटल संचालक, बिहार में घटी सिलिंडर खपत

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कमर्शियल LPG की बढ़ती कीमतों ने बदली कारोबारियों की रणनीति, बिहार में 35% तक घटी सिलिंडर खपत

कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर के दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी का असर अब बिहार के होटल, रेस्तरां, मिठाई दुकानों और अन्य खाद्य कारोबारों पर साफ नजर आने लगा है। बढ़ती लागत के दबाव में कई कारोबारी गैस की जगह कोयला और इंडक्शन जैसे विकल्पों को अपना रहे हैं, जिसके चलते कमर्शियल सिलिंडरों की खपत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।

फरवरी में 19 किलोग्राम वाला कमर्शियल एलपीजी सिलिंडर जहां करीब 2,010 रुपये में मिल रहा था, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 3,421 रुपये तक पहुंच गई है। कुछ ही महीनों में हुई करीब 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी ने छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों का बजट बिगाड़ दिया है।

पटना से लेकर पूरे बिहार तक घटी मांग

इंडियन ऑयल के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में पटना में हर महीने 32,305 कमर्शियल सिलिंडरों की खपत होती थी। अब यह आंकड़ा घटकर 23,742 पर पहुंच गया है, जो करीब 26.5 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।

वहीं पूरे बिहार में कमर्शियल सिलिंडरों की खपत 68,729 से घटकर 44,596 रह गई है। यानी राज्य में मांग लगभग 35 प्रतिशत तक कम हो गई है।

कोयला और इंडक्शन बने नए विकल्प

गैस की बढ़ती कीमतों के कारण कई होटल और रेस्तरां संचालक अब वैकल्पिक ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ा रहे हैं। पटना के कई कारोबारियों का कहना है कि पहले जहां महीने में दर्जनों सिलिंडरों की खपत होती थी, वहीं अब कोयले की भट्ठी और इंडक्शन के इस्तेमाल से गैस की जरूरत काफी कम हो गई है।

कुछ रेस्तरां संचालकों के अनुसार, लागत नियंत्रित रखने के लिए रसोई संचालन के तरीके बदले गए हैं। हालांकि ग्राहकों को आकर्षित बनाए रखने के लिए अभी तक मेन्यू कीमतों में व्यापक बढ़ोतरी नहीं की गई है।

ग्राहकों की संख्या पर भी असर

कारोबारियों का कहना है कि बढ़ती महंगाई का असर सिर्फ लागत पर ही नहीं, बल्कि ग्राहकों की संख्या पर भी पड़ रहा है। कई प्रतिष्ठानों में ग्राहकों की आवाजाही पहले की तुलना में कम हुई है। वहीं जिन व्यवसायों में गैस का उपयोग अनिवार्य है, वहां बढ़ी हुई कीमतों का सीधा असर मुनाफे पर पड़ रहा है।

मिठाई और नमकीन कारोबार से जुड़े व्यापारियों का भी कहना है कि गैस, खाद्य तेल, दूध और अन्य कच्चे माल की बढ़ती कीमतों ने परिचालन खर्च बढ़ा दिया है। ऐसे में लागत कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन का सहारा लिया जा रहा है।

बढ़ सकते हैं खाने-पीने के दाम

व्यवसायियों का कहना है कि यदि कमर्शियल एलपीजी की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं, तो आने वाले महीनों में खाद्य पदार्थों और रेस्तरां मेन्यू की कीमतों में बढ़ोतरी करना मजबूरी बन सकता है। फिलहाल कई प्रतिष्ठान लागत और ग्राहक मांग के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

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