प्रदूषण पर लगी लगाम, बिहार के 23 शहरों में बेहतर हुई वायु गुणवत्ता

4

बिहार के 23 शहरों में सुधरी हवा, 2025-26 में अब तक का सबसे बेहतर AQI दर्ज

बिहार में वायु प्रदूषण के मोर्चे पर राहत भरी तस्वीर सामने आई है। बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (बीएसपीसीबी) के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि राजधानी पटना समेत राज्य के 23 शहरों में वायु गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है। वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य की हवा अब तक की सबसे स्वच्छ श्रेणी में दर्ज की गई है।

पर्षद के अनुसार पटना, हाजीपुर, औरंगाबाद, बिहारशरीफ, छपरा, राजगीर, समस्तीपुर और सिवान का वार्षिक औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) मध्यम श्रेणी में रहा। वहीं मुजफ्फरपुर, गया, भागलपुर, अररिया, आरा, बेगूसराय, बेतिया, बक्सर, कटिहार, किशनगंज, मंगूराहा (पश्चिम चंपारण), मोतिहारी, पूर्णिया, सहरसा और सासाराम की हवा संतोषजनक श्रेणी में दर्ज की गई।

सख्ती और जागरूकता का दिखा असर

बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद के अध्यक्ष डॉ. डी.के. शुक्ला ने बताया कि लगातार निगरानी, जनजागरूकता अभियान और पर्यावरणीय मानकों के उल्लंघन पर कार्रवाई से वायु गुणवत्ता में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्यों में नियमों का पालन सुनिश्चित करने और विभिन्न विभागों के साथ समन्वय बढ़ाने से प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों में कमी आई है।

पर्षद के मुताबिक, बीते वर्ष की तुलना में इस बार पीएम 10 और पीएम 2.5 जैसे हानिकारक कणों की सांद्रता में भी गिरावट दर्ज की गई है। यही वजह है कि इस वर्ष राज्य का कोई भी शहर ‘बहुत खराब’ या ‘गंभीर’ वायु गुणवत्ता श्रेणी में नहीं पहुंचा।

2026 के लिए नई कार्ययोजना तैयार

वायु गुणवत्ता को और बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने धूल और धुएं को कम करने की नई कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत बड़े पैमाने पर पौधारोपण, प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर नियंत्रण, पराली जलाने पर रोक और किसानों के बीच जागरूकता अभियान चलाने जैसे कदम शामिल हैं। जिला और वन अधिकारियों को पौधारोपण के लिए उपयुक्त स्थलों की पहचान करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम से मिल रही मदद

केंद्र सरकार के राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के तहत पटना, मुजफ्फरपुर और गया समेत कई शहरों में प्रदूषण नियंत्रण के प्रयासों को गति मिली है। राज्य में पारंपरिक ईंट-भट्टों की तकनीक को आधुनिक बनाया जा रहा है, जिससे उत्सर्जन में कमी आने की उम्मीद है। साथ ही औद्योगिक क्षेत्रों में स्वच्छ और ऊर्जा-कुशल उपकरणों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है।

वायु गुणवत्ता प्रबंधन को वैज्ञानिक आधार देने के लिए बिहार राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद ने आईआईटी दिल्ली, आईआईटी पटना और Banaras Hindu University के साथ समझौते किए हैं। इसके अलावा गांगेय क्षेत्र में प्रदूषण के विभिन्न स्रोतों का अध्ययन करने के लिए National Institute of Oceanography के साथ भी सहयोग किया जा रहा है।

निगरानी नेटवर्क का होगा विस्तार

राज्य में वायु प्रदूषण की निगरानी को और मजबूत बनाने के लिए 16 जिलों में नए स्वचालित वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग केंद्र स्थापित किए जाएंगे। फिलहाल 22 जिलों में 34 केंद्र संचालित हैं, जो राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क से जुड़े हुए हैं। अधिकारियों का मानना है कि निगरानी तंत्र के विस्तार से प्रदूषण नियंत्रण की रणनीतियों को और प्रभावी ढंग से लागू किया जा सकेगा।

Comments are closed.