WSJ का दावा: रूस ने यूक्रेनी सैनिकों के खिलाफ यौन हिंसा को बनाया युद्ध का हथियार

0

WSJ रिपोर्ट में रूस पर गंभीर आरोप, यूक्रेनी पुरुषों के खिलाफ यौन हिंसा को बनाया गया युद्ध का सुनियोजित हथियार

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच द वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक रिपोर्ट में रूस पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूसी सेना ने यूक्रेनी पुरुषों के खिलाफ यौन हिंसा का इस्तेमाल युद्ध की एक सुनियोजित रणनीति के रूप में किया। यह रिपोर्ट यूक्रेनी अभियोजकों, संयुक्त राष्ट्र के जांचकर्ताओं और रूसी कैद से रिहा हुए लोगों के बयानों पर आधारित है।

रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2022 में रूस के पूर्ण पैमाने पर आक्रमण के बाद से यूक्रेनी सैनिकों और आम नागरिकों के साथ यौन उत्पीड़न, शारीरिक यातना और मानसिक प्रताड़ना के कई मामले सामने आए हैं। आरोप है कि इनका उद्देश्य पीड़ितों को मानसिक रूप से तोड़ना और भय का माहौल बनाना था।

‘वे मुझे मानसिक रूप से तोड़ना चाहते थे’

रिपोर्ट में यूक्रेनी सैनिक सेरही बॉयचुक का जिक्र किया गया है, जिन्हें रूस ने दो वर्ष से अधिक समय तक बंदी बनाकर रखा। बॉयचुक ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उनके साथ गंभीर यौन उत्पीड़न और शारीरिक यातनाएं की गईं।

उनके मुताबिक, उन्हें बोतलों और डंडों से प्रताड़ित किया गया तथा उनके गुप्तांगों पर चाकू रखकर धमकाया गया। उन्होंने कहा कि इन अत्याचारों का मकसद उन्हें मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ देना था।

संयुक्त राष्ट्र ने दर्ज किए सैकड़ों मामले

रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र ने युद्ध के दौरान कथित यौन हिंसा के करीब 310 मामलों का दस्तावेजीकरण किया है। इनमें बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, गुप्तांगों को नुकसान पहुंचाना, बिजली के झटके देना और अन्य प्रकार की गंभीर यातनाएं शामिल हैं। दर्ज मामलों में अधिकांश पीड़ित पुरुष बताए गए हैं, जबकि महिलाओं और लड़कियों के मामले भी सामने आए हैं।

‘यह अलग-अलग घटनाएं नहीं, सुनियोजित पैटर्न’

यूक्रेनी अभियोजकों का कहना है कि अलग-अलग मामलों में सामने आए उत्पीड़न के तरीके एक जैसे हैं, जिससे संकेत मिलता है कि यह केवल कुछ सैनिकों की व्यक्तिगत हरकत नहीं, बल्कि एक व्यापक और व्यवस्थित पैटर्न हो सकता है।

बोस्निया युद्ध अपराधों की जांच कर चुके पूर्व अंतरराष्ट्रीय अभियोजक डेविड श्वेंडिमैन ने WSJ से कहा कि इस तरह के मामलों में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों के लिए यह कहना मुश्किल है कि उन्हें घटनाओं की जानकारी नहीं थी, भले ही उन्होंने प्रत्यक्ष आदेश न दिए हों।

बिजली के झटके और अन्य यातनाओं का आरोप

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कुछ बंदी शिविरों में कैदियों के गुप्तांगों पर तार लगाकर बिजली के झटके दिए जाते थे। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, कुछ जेलकर्मी कथित तौर पर इस यातना को व्यंग्यात्मक रूप से “पुतिन को कॉल” कहते थे।

WSJ ने पूर्व जेल अधिकारियों के हवाले से दावा किया कि कुछ रूसी कारागारों में यूक्रेनी युद्धबंदियों के साथ हिंसा पर प्रभावी रोक नहीं थी और यौन उत्पीड़न भी प्रताड़ना का हिस्सा था।

आम नागरिकों के साथ भी कथित अत्याचार

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि केवल सैनिक ही नहीं, बल्कि आम नागरिक भी कथित यातनाओं का शिकार बने। खेरसॉन निवासी ओलेक्सी सिवक ने आरोप लगाया कि यूक्रेनी झंडा लगाने के बाद उन्हें हिरासत में लेकर बिजली के झटके दिए गए। बाद में उन्होंने ऐसे यूक्रेनी पुरुषों के लिए एक सहायता समूह शुरू किया, जो रूस पर इसी तरह के अत्याचारों के आरोप लगाते हैं।

यूक्रेनी जांच एजेंसियों का दावा है कि रूस के भीतर कई हिरासत केंद्रों में इस तरह की घटनाएं हुईं। हालांकि, WSJ के अनुसार, इन आरोपों पर क्रेमलिन और रूस की फेडरल प्रिजन सर्विस ने टिप्पणी करने से इनकार किया है।

Comments are closed.