गाजा में इजरायली हमले थमने के आसार नहीं, ट्रंप की पहल के बीच 13 लोगों की मौत

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ट्रंप की शांति पहल के बीच गाजा में इजरायली हमले जारी, 13 फलस्तीनियों की मौत

अमेरिका की मध्यस्थता में गाजा में युद्धविराम और शांति समझौते की कोशिशें जारी हैं, लेकिन इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि हमास के पूरी तरह हथियार डालने तक उसका सैन्य अभियान नहीं रुकेगा। इसी बीच रविवार को इजरायली हवाई हमलों में कम से कम 13 फलस्तीनियों की मौत हो गई, जबकि एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए।

लगातार दूसरे दिन गाजा पर हवाई हमले

रविवार को इजरायल ने लगातार दूसरे दिन गाजा पट्टी में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। लड़ाकू विमानों ने गाजा सिटी, खान यूनिस और दीर अल-बलाह समेत कई इलाकों को निशाना बनाया। स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, हमलों में शरणार्थी शिविर, रिहायशी मकान और बहुमंजिला इमारतें क्षतिग्रस्त हुईं। कई इमारतें ढह गईं और कुछ स्थानों पर आग लग गई।

शांति वार्ता के बीच बढ़ी तल्खी

ये हमले ऐसे समय हुए हैं, जब अमेरिकी प्रतिनिधियों की मौजूदगी में युद्धविराम और शांति योजना के दूसरे चरण पर बातचीत चल रही है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, हमास ने कुछ शर्तों के साथ हथियार छोड़ने की इच्छा जताई है। उसकी प्रमुख मांगों में गाजा से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी और सैन्य कार्रवाई का स्थायी अंत शामिल है।

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वार्ता में हुई प्रगति पर संतोष जताया था। हालांकि ताजा सैन्य कार्रवाई ने शांति प्रक्रिया को लेकर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है।

‘हमास के हथियार डालने तक अभियान जारी रहेगा’

इजरायल के ऊर्जा मंत्री एली कोहेन ने कहा कि सरकार हमास को हथियार डालने का अवसर देना चाहती है, लेकिन उसे इस बात पर संदेह है कि संगठन ऐसा करेगा। उन्होंने कहा कि इजरायल हमले रोकने के लिए किसी समझौते को स्वीकार नहीं करेगा और सैन्य अभियान तब तक जारी रहेगा, जब तक हमास का सैन्य ढांचा पूरी तरह समाप्त नहीं हो जाता।

कोहेन ने यह भी कहा कि अमेरिका के साथ बनी सहमति के अनुसार हमास का निरस्त्रीकरण और उसका अस्तित्व समाप्त होना इजरायल की प्रमुख शर्तों में शामिल है।

गाजा के 70 फीसदी हिस्से पर नियंत्रण का दावा

इजरायली सरकार का दावा है कि उसकी सेना इस समय गाजा पट्टी के करीब 70 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण रखती है। अधिकारियों का कहना है कि यदि हमास ने हथियार नहीं डाले, तो सैन्य अभियान आगे भी जारी रहेगा।

एली कोहेन का बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि वह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सुरक्षा मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति के सदस्य हैं। हमास की ओर से हथियार छोड़ने की इच्छा जताने की खबरों के बाद यह इजरायली सरकार की पहली औपचारिक प्रतिक्रिया है।

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