ईरान में हिजाब को लेकर फिर बढ़ा विवाद, कट्टरपंथियों की सख्ती की मांग पर पेजेश्कियान ने उठाए सवाल

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ईरान में अनिवार्य हिजाब को लेकर पुराना विवाद एक बार फिर तेज हो गया है।

कट्टरपंथी धड़ा नियमों को सख्ती से लागू करने की मांग कर रहा है, जबकि राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने सवाल उठाया है कि क्या कानून और दबाव के जरिए लोगों के व्यवहार व धार्मिक विश्वास में बदलाव लाया जा सकता है।

अमेरिका के साथ हालिया टकराव के दौरान सरकारी कार्यक्रमों और सरकारी मीडिया में कुछ महिलाओं को बिना हिजाब के देखा गया था। इससे संकेत मिले कि प्रशासन दूसरे अहम मुद्दों के बीच ड्रेस कोड लागू करने में अपेक्षाकृत नरम रहा। अब रूढ़िवादी धर्मगुरुओं और नेताओं के दबाव के बाद कार्रवाई फिर बढ़ती दिखाई दे रही है।

कैफे और दुकानों पर बढ़ी कार्रवाई

मानवाधिकार समूह HRANA के अनुसार, 19 जुलाई को तेहरान में कम से कम सात कैफे और रेस्तरां कथित तौर पर अनिवार्य हिजाब नियमों का पालन नहीं कराने के आरोप में बंद किए गए। कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी ड्रेस कोड के कथित उल्लंघन को लेकर कार्रवाई की जानकारी सामने आई है।

तेहरान अभियोजक कार्यालय ने कैफे, रेस्तरां और कथित तौर पर अनुचित कपड़े बेचने वाली दुकानों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है। दक्षिण खोरासान प्रांत में भी अनिवार्य हिजाब और सामाजिक मानदंडों के कथित उल्लंघन के चलते 10 कैफे बंद किए जाने की खबर है।

महसा अमिनी के बाद भी नहीं थमा विरोध

हिजाब नियमों पर नई सख्ती महसा अमिनी की पुलिस हिरासत में मौत के करीब चार साल बाद सामने आई है। अमिनी को ड्रेस कोड के कथित उल्लंघन के आरोप में हिरासत में लिया गया था। उनकी मौत के बाद देशभर में ‘वुमन, लाइफ, फ्रीडम’ आंदोलन भड़का, जिसे सुरक्षा बलों ने कड़े तरीके से दबा दिया था।

इसके बावजूद खासकर युवा महिलाओं के बीच अनिवार्य हिजाब नियमों की अनदेखी जारी रही। बिना हिजाब सार्वजनिक रूप से दिखाई देने वाली महिलाओं और कलाकारों के खिलाफ भी कार्रवाई के मामले सामने आते रहे हैं।

पेजेश्कियान ने सख्ती पर उठाए सवाल

राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हिजाब कानूनों के सख्त प्रवर्तन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि केवल कानून के जरिए लोगों के व्यवहार को बदलना आसान नहीं है और धार्मिक मामलों में सांस्कृतिक संवाद ज्यादा प्रभावी हो सकता है।

पेजेश्कियान ने अपनी बेटी का उदाहरण देते हुए भी सवाल किया कि क्या असहमति की स्थिति में उस पर जबरदस्ती की जानी चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि व्यवहार और विश्वास में बदलाव सांस्कृतिक प्रक्रिया है और इसे केवल दबाव के जरिए हासिल नहीं किया जा सकता।

कट्टरपंथी धड़ा सख्ती के पक्ष में

दूसरी ओर, कट्टरपंथी नेता सरकार पर हिजाब नियमों को पूरी तरह लागू करने का दबाव बना रहे हैं। रूढ़िवादी अखबार ‘कयहान’ के संपादक हुसैन शरीयत मदारी ने इसे सरकार की कानूनी और धार्मिक जिम्मेदारी बताया है।

संसद सदस्य मोहम्मद-तकी नकदली ने भी सार्वजनिक स्थानों पर ड्रेस कोड के कथित उल्लंघन को गंभीर खतरा बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। कट्टरपंथी धड़े का तर्क है कि सामाजिक और धार्मिक मानदंडों में गिरावट देश के लिए बाहरी खतरों जितनी ही गंभीर चुनौती है।

सख्त कानून पर भी रोक

ईरान के इस्लामिक दंड संहिता के तहत सार्वजनिक स्थानों पर अनिवार्य हिजाब के बिना दिखाई देना अपराध माना जाता है, हालांकि हिजाब की कानूनी परिभाषा को लेकर स्पष्टता की कमी पर सवाल उठते रहे हैं।

2024 में हिजाब नियमों को और सख्त करने वाला कानून मंजूर किया गया था, जिसमें अधिक कड़ी सजा और निगरानी का प्रावधान था। हालांकि, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के हस्तक्षेप के बाद इसके लागू होने पर रोक लगा दी गई।

इस तरह ईरान में हिजाब को लेकर एक बार फिर दो अलग-अलग रुख आमने-सामने हैं—कट्टरपंथी सख्त कानून और कार्रवाई चाहते हैं, जबकि राष्ट्रपति पेजेश्कियान सांस्कृतिक संवाद के जरिए बदलाव की बात कर रहे हैं।

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