ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब का बड़ा फैसला, तेल पाइपलाइन बंद; ईरान पर शक गहराया

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सऊदी की तेल पाइपलाइन ड्रोन हमले के बाद बंद, ट्रंप ने ईरान पर जताया शक; इराक में तेज हुई जांच

सऊदी अरब ने तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले के बाद अपनी पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया है। हमले की जिम्मेदारी फिलहाल किसी संगठन ने नहीं ली है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके पीछे ईरान का हाथ होने की आशंका जताई है।

सऊदी अरब और इराक के अधिकारियों के मुताबिक, ड्रोन हमले इराक के मैसान प्रांत से किए गए थे। इस इलाके में ईरान समर्थित मिलिशिया की सक्रियता रही है। हमले के बाद इराक के प्रधानमंत्री और सशस्त्र बलों के कमांडर-इन-चीफ अली अल-जैदी ने मैसान ऑपरेशंस कमांडर को पद से हटा दिया।

इराक ने ड्रोन हमलों के लॉन्चिंग पैड का पता लगाने के लिए संयुक्त जांच कराने के ईरान के प्रस्ताव को भी स्वीकार कर लिया है। इराकी प्रधानमंत्री के अनुरोध के बाद सऊदी अरब ने फिलहाल जवाबी कार्रवाई नहीं करने का फैसला किया है।

लाल सागर में हूती की बढ़ी सक्रियता

इस बीच, यमन के लाल सागर तट पर हूती विद्रोहियों की गतिविधियां भी तेज हो रही हैं। दो ईरानी सूत्रों के मुताबिक, ईरान ने पिछले सप्ताह हूती को सऊदी अरब के खिलाफ हमले बढ़ाने के निर्देश दिए थे। सूत्रों का दावा है कि इसके लिए अतिरिक्त धन, हथियार और अधिकारियों की मदद का भी वादा किया गया था।

हालांकि, हूती के सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने कहा कि पहले से घोषित प्रतिबंधों के दायरे में आने वाले सऊदी जहाजों को छोड़कर अन्य जहाजों के लिए समुद्री मार्ग सुरक्षित है।

सऊदी की सैन्य मदद पर अमेरिका का रुख साफ

हूती हमलों के बीच अमेरिका के सामने सऊदी अरब की मदद करने को लेकर मुश्किल स्थिति बनी हुई है। वाशिंगटन को आशंका है कि सीधे सैन्य हस्तक्षेप से क्षेत्रीय संघर्ष और व्यापक हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने गुरुवार को ट्रंप से फोन पर बातचीत कर हूती के खिलाफ सैन्य सहायता मांगी थी। हालांकि, अमेरिका ने फिलहाल सीधे युद्ध में उतरने से दूरी बनाए रखी है और सऊदी को खुफिया जानकारी मुहैया कराने में मदद की पेशकश की है।

ट्रंप ने शनिवार को क्राउन प्रिंस के साथ अपनी बातचीत की पुष्टि की। उन्होंने यह भी कहा कि हूती की ओर से उनके प्रशासन से संपर्क किया गया था और अमेरिका से इस संघर्ष में सीधे शामिल नहीं होने का आग्रह किया गया था।

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