होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों पर हुए ताजा हमलों ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
आपूर्ति में संभावित बाधा की आशंका के बीच सोमवार को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 3 प्रतिशत चढ़कर 107.74 डॉलर प्रति बैरल, जबकि अमेरिकी क्रूड 2.88 प्रतिशत बढ़कर 102.93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
तेल की कीमतों में यह उछाल खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच आया है। होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने से बाजार में आपूर्ति बाधित होने का डर गहरा गया है।
सऊदी अरब में हूतियों का हमला
सऊदी अरब की सरकारी मीडिया के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी जाजान प्रांत को निशाना बनाया। हमले में कई घरों और एक मस्जिद को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा हूतियों ने पड़ोसी प्रांत में मौजूद सऊदी सैन्य अड्डे को भी निशाना बनाया।
वहीं, ब्रिटिश मैरीटाइम सिक्योरिटी एजेंसी यूकेएमटीओ ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज पर प्रोजेक्टाइल से हमला हुआ। हमले के बाद जहाज में आग लग गई, जिसके चलते चालक दल को सुरक्षित बाहर निकालना पड़ा।
सऊदी तेल पाइपलाइन बंद होने से बढ़ी आपूर्ति की चिंता
वैश्विक तेल बाजार की चिंता शुक्रवार को उस समय और बढ़ गई, जब ड्रोन हमले के बाद सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को बंद कर दिया गया। यह पाइपलाइन सऊदी अरब को होर्मुज जलडमरूमध्य से बचते हुए वैकल्पिक मार्ग से तेल निर्यात करने में मदद करती है।
सऊदी अरब दुनिया के प्रमुख तेल निर्यातकों में शामिल है। ऐसे में इस पाइपलाइन के बंद होने से वैश्विक तेल आपूर्ति के करीब 4 प्रतिशत हिस्से पर असर पड़ने का खतरा पैदा हो गया है। लगातार हो रहे व्यवधानों के कारण पिछले सप्ताह कच्चे तेल की कीमतों में करीब 8 प्रतिशत की तेजी आई थी और जुलाई के बाद पहली बार क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था।
ईरान-खाड़ी वार्ता भी टली
होर्मुज को लेकर बढ़ते तनाव का असर कूटनीतिक प्रयासों पर भी पड़ा है। ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे पर चर्चा के लिए खाड़ी देशों और ईरान के बीच ओमान में प्रस्तावित बैठक को फिलहाल स्थगित कर दिया गया है।
होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा मार्गों में से एक है। यहां किसी भी तरह का लंबा व्यवधान वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर डाल सकता है। ऐसे में क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच बाजार की नजर आगे होने वाली घटनाओं पर बनी हुई है।
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