केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह रविवार को अहमदाबाद के साबरमती रेलवे स्टेशन से देश की पहली LNG ड्यूल-फ्यूल ट्रेन को हरी झंडी दिखाएंगे।
इस दौरान वह साबरमती स्टेशन पर किए गए विकास कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे। कार्यक्रम से पहले शाह WAG-12 लोकोमोटिव के रखरखाव के लिए बनाए गए मेंटेनेंस शेड का उद्घाटन करेंगे। इस ट्रेन के ड्राइविंग पावर कार (DPC) में पहली बार LNG आधारित ड्यूल-फ्यूल तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसकी मदद से एक ही इंजन LNG और डीजल दोनों ईंधनों से संचालित हो सकता है। रेलवे का लक्ष्य इस तकनीक के जरिए डीजल पर निर्भरता घटाने, ईंधन लागत कम करने और प्रदूषण में कमी लाना है।
परियोजना के तहत 1,400 हॉर्स पावर क्षमता वाले दो DPC को LNG ड्यूल-फ्यूल सिस्टम में परिवर्तित किया गया है। रेलवे के अनुसार, इन दोनों इंजनों का 2,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक फील्ड ट्रायल किया जा चुका है। परीक्षण के दौरान तकनीक की विश्वसनीयता, प्रदर्शन और परिचालन क्षमता को परखा गया।
रेलवे के मुताबिक, LNG के इस्तेमाल से डीजल की खपत के साथ CO2, NOx और पार्टिकुलेट मैटर जैसे प्रदूषकों के उत्सर्जन को कम करने में मदद मिल सकती है। ट्रायल के आंकड़ों के आधार पर करीब 23.9 लाख रुपये की सालाना ईंधन बचत का अनुमान लगाया गया है। हालांकि, वास्तविक बचत LNG और डीजल की कीमतों, परिचालन परिस्थितियों और LNG के इस्तेमाल के अनुपात पर निर्भर करेगी।
इंजन में 2,200 लीटर क्षमता का LNG टैंक लगाया गया है, जिसमें करीब 950 से 1,000 किलोग्राम उपयोगी LNG भरी जा सकती है। टैंक भरने के बाद ट्रेन लगभग 444 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है।
ड्यूल-फ्यूल प्रणाली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इंजन जरूरत के अनुसार LNG और डीजल के बीच ईंधन का इस्तेमाल कर सकता है। रेलवे इसे वैकल्पिक ईंधन की दिशा में एक अहम कदम के रूप में देख रहा है।
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