राहुल गांधी समेत 11 विपक्षी नेताओं की SC में याचिका, SIR पर रोक से लेकर EC के रिकॉर्ड तक 10 मांगें

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SIR पर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा INDIA गठबंधन, राहुल गांधी समेत 11 नेताओं ने चुनाव आयोग के खिलाफ उठाए सवाल

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी INDIA गठबंधन ने सोमवार को चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। विपक्षी नेताओं और हजारों समर्थकों ने शीर्ष अदालत तक मार्च किया। इसके बाद चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता, मतदाताओं के नाम हटाने और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) से जुड़े मुद्दों की जांच की मांग करते हुए संयुक्त याचिका दाखिल की गई।

याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के फैसलों, चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली और SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। विपक्ष ने SIR पर अंतरिम रोक लगाने तथा पंजाब सहित चुनावी राज्यों में सभी पात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल करने की मांग की है। गठबंधन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य मतदाता सूची की विश्वसनीयता और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित करना है।

राहुल गांधी समेत 11 विपक्षी नेता याचिकाकर्ता

संयुक्त याचिका दाखिल करने वालों में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, माकपा के एमए बेबी, भाकपा के डी. राजा, झारखंड मुक्ति मोर्चा की महुआ माजी, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के ईटी मोहम्मद बशीर शामिल हैं।

CJI सूर्यकांत से मुलाकात नहीं हुई, राहुल ने क्या कहा?

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विपक्षी प्रतिनिधिमंडल को मुलाकात का समय नहीं दिया। इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष सुप्रीम कोर्ट और CJI का सम्मान करता है।

उन्होंने कहा, “हम CJI और सुप्रीम कोर्ट का सम्मान करते हैं। हमें खुशी है कि उन्होंने हमें आगे का रास्ता दिखाया है।” राहुल के मुताबिक, याचिका दाखिल करने का विकल्प बताना भी आगे बढ़ने का एक रास्ता है।

स्वतंत्र पैनल से जांच कराने की मांग

विपक्षी गठबंधन ने सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया है कि एक स्वतंत्र पैनल गठित किया जाए, जिसकी अध्यक्षता शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करें। इसमें तकनीकी विशेषज्ञों और प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भी शामिल करने की मांग की गई है।

प्रस्तावित पैनल को मतदाता सूची के डेटाबेस की विश्वसनीयता और SIR लागू करने की प्रक्रिया की जांच करने का जिम्मा देने की मांग है। याचिका में चुनाव आयोग से SIR से संबंधित फाइलें, बैठकों के मिनट्स, आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियां और सिस्टम के एक्सेस लॉग भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।

इसके अतिरिक्त, EVM से जुड़ी प्रक्रियाओं, तकनीकी प्रोटोकॉल, कार्यप्रणाली और तकनीकी ढांचे की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग उठाई गई है।

मतदाता सूची और लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा

याचिका में विपक्ष ने दलील दी कि मामला व्यापक जनहित से जुड़ा है। उसके अनुसार, प्रत्येक पात्र नागरिक के मतदान के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करना और मतदाता सूची तैयार करने तथा उसमें संशोधन की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए रखना आवश्यक है।

विपक्ष का कहना है कि चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता और सामूहिक निर्णय प्रक्रिया सुरक्षित रहनी चाहिए। मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के फैसले कानून के अनुसार होने चाहिए, ताकि चुनावी व्यवस्था पर जनता का भरोसा बना रहे।

फॉर्म-6 में कथित बदलाव पर आपत्ति

नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कथित तौर पर किए गए अनधिकृत बदलावों का मुद्दा भी याचिका में उठाया गया है। विपक्ष की ओर से वकील प्रसन्ना एस ने दलील दी कि कानूनी रूप से निर्धारित फॉर्म में बिना अधिकार अतिरिक्त शर्तें जोड़ने से पात्र नागरिकों, विशेषकर पहली बार वोट देने वालों को पंजीकरण में परेशानी हो सकती है।

याचिकाकर्ताओं ने आशंका जताई कि ऐसी शर्तों के कारण उन नागरिकों के नाम भी मतदाता सूची में शामिल नहीं हो पाएंगे, जो इसके लिए पात्र हैं। उन्होंने मांग की कि फॉर्म-6 का इस्तेमाल मतदाता पंजीकरण से जुड़े 1960 के नियमों के अनुरूप किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री ने याचिका में कुछ कमियां बताई थीं। विपक्षी गठबंधन के वकील ने अदालत को आश्वस्त किया कि इन कमियों को समय रहते दूर कर दिया जाएगा।

ECINET और ERONET के संचालन पर सवाल

विपक्ष ने ECINET और ERONET मतदाता सूची डेटाबेस के केंद्रीकृत और कथित रूप से अपारदर्शी संचालन पर भी चिंता जताई। याचिका में कहा गया कि उचित नोटिस और सुनवाई के बिना मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाना गंभीर मामला है।

विपक्ष ने यह भी कहा कि जिन मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए गए हैं, उन्हें दोबारा सूची में शामिल करने के लिए एक प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि मामले का निपटारा होने तक चुनाव आयोग संविधान और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के अनुरूप काम करे।

हटाए गए नामों की पूरी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग

INDIA गठबंधन चाहता है कि चुनाव आयोग SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नामों की सूची बूथ-वार सार्वजनिक करे। इसके साथ ही प्रत्येक नाम हटाने का कारण और उम्र तथा लिंग के आधार पर संबंधित आंकड़े भी जारी किए जाएं।

विपक्ष ने पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा शामिल करने के लिए एक कारगर व्यवस्था बनाने की मांग की है। उसका तर्क है कि मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया जवाबदेह और पारदर्शी होनी चाहिए, ताकि कोई भी योग्य नागरिक अपने मतदान के अधिकार से वंचित न रहे।

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