ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिका का हमला क्यों? होर्मुज जलडमरूमध्य के पास कैसे बना हुआ है यह रणनीतिक सैन्य गढ़?

1

अमेरिका ने ईरान के केशम द्वीप पर क्यों किया हमला? होर्मुज के पास स्थित इस रणनीतिक ठिकाने की क्या है अहमियत?

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण केशम द्वीप पर एयर स्ट्राइक की है। इस हमले में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के सैन्य बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने की खबर है। ईरान की सरकारी मीडिया ने भी द्वीप पर कई विस्फोट होने की पुष्टि की है।

इस घटनाक्रम ने केशम द्वीप को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा के केंद्र में ला दिया है। सवाल यह है कि आखिर अमेरिका ने ईरान के इसी द्वीप को क्यों निशाना बनाया और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित यह जगह तेहरान के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों है?

दरअसल, केशम द्वीप फारस की खाड़ी का सबसे बड़ा द्वीप है। इसकी भौगोलिक स्थिति इसे सामरिक और सैन्य दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के नजदीक स्थित है, जहां से दुनिया की बड़ी मात्रा में ऊर्जा आपूर्ति गुजरती है। ईरान के लिए यह द्वीप समुद्री निगरानी, सैन्य तैनाती और रणनीतिक गतिविधियों का अहम केंद्र माना जाता है।

अमेरिकी कार्रवाई का उद्देश्य ईरानी सैन्य क्षमताओं से पैदा होने वाले संभावित खतरों को कम करना और क्षेत्र में अपने सैनिकों तथा समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बताया गया है।

ईरान के लिए क्यों अहम है केशम द्वीप?

केशम द्वीप ईरान के दक्षिणी हिस्से में होर्मोजगान प्रांत में स्थित है। यह बंदर अब्बास के पास फारस की खाड़ी में फैला हुआ है और मुख्य भूमि से एक संकरी जलधारा के जरिए अलग होता है। इसकी भौगोलिक स्थिति ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री क्षेत्र पर नजर रखने में रणनीतिक बढ़त देती है।

IRGC का महत्वपूर्ण सैन्य केंद्र

केशम द्वीप को ईरान की सैन्य व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान हासिल है। यहां रडार प्रणालियों, तटीय रक्षा और नौसैनिक गतिविधियों से जुड़े बुनियादी ढांचे की मौजूदगी बताई जाती है। ईरान की सैन्य रणनीति में इस क्षेत्र का इस्तेमाल समुद्री निगरानी और होर्मुज के आसपास अपनी मौजूदगी बनाए रखने के लिए अहम माना जाता है।

ड्रोन और तटीय मिसाइल क्षमताओं के लिहाज से भी यह इलाका रणनीतिक महत्व रखता है। ऐसे में यहां मौजूद सैन्य ढांचे को निशाना बनाना ईरान की समुद्री निगरानी और रक्षा क्षमताओं को प्रभावित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

दुनिया के 20 प्रतिशत तेल व्यापार का अहम रास्ता है होर्मुज

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में शामिल है। वैश्विक स्तर पर समुद्र के रास्ते होने वाली तेल और LNG आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी मार्ग से गुजरता है।

इस वजह से होर्मुज में किसी भी तरह का सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार, ऊर्जा कीमतों और वैश्विक व्यापार को प्रभावित कर सकता है। इस समुद्री मार्ग पर ईरान की भौगोलिक स्थिति उसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण बनाती है।

प्राकृतिक सुंदरता और भूवैज्ञानिक विरासत के लिए भी मशहूर

सैन्य और सामरिक महत्व के अलावा केशम द्वीप अपनी प्राकृतिक खूबसूरती और अनूठी भूवैज्ञानिक संरचनाओं के लिए भी जाना जाता है। यहां मिडिल ईस्ट का पहला यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क स्थित है।

द्वीप की प्रसिद्ध नमकदान गुफा छह किलोमीटर से अधिक लंबी है। इसके अलावा वैली ऑफ स्टार्स और हारा मैंग्रोव वन भी यहां के प्रमुख आकर्षण हैं। ये मैंग्रोव वन प्रवासी पक्षियों और समुद्री जैव विविधता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच बढ़ा रणनीतिक महत्व

28 फरवरी से अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष ने पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को गंभीर बना दिया है। दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के साथ कूटनीतिक समाधान की कोशिशें भी जारी रहने की खबरें हैं।

ऐसे माहौल में होर्मुज जलडमरूमध्य के पास स्थित केशम द्वीप पर अमेरिकी हमला क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा करता है। हालांकि, हमले में हुए नुकसान और ईरान की सैन्य क्षमताओं पर इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही किया जा सकेगा।

Comments are closed.