6 घंटे तक CID के सामने अभिषेक बनर्जी, फर्जी हस्ताक्षर मामले में पूछे गए ये 4 बड़े सवाल

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पश्चिम बंगाल में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन से जुड़े कथित फर्जी हस्ताक्षर मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं।

इस मामले में राज्य सीआईडी ने गुरुवार को कोलकाता स्थित अपने मुख्यालय भवानी भवन में उनसे करीब छह घंटे तक पूछताछ की। लंबी पूछताछ के बाद अभिषेक रात करीब 11:30 बजे मुख्यालय से बाहर निकले।

14 जून को फिर होंगे पेश

सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने अभिषेक बनर्जी को 14 जून को दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया है। इससे पहले जारी किए गए तीन समन पर उन्होंने बीमारी और कानूनी प्रक्रिया का हवाला देते हुए हाजिर नहीं होने का फैसला किया था। हालांकि, अदालत के निर्देश के बाद वह गुरुवार शाम करीब 5:50 बजे सीआईडी मुख्यालय पहुंचे। पूछताछ खत्म होने के बाद वह सीधे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित आवास पहुंचे।

पूछताछ में पूछे गए ये अहम सवाल

करीब छह घंटे चली पूछताछ के दौरान सीआईडी अधिकारियों ने अभिषेक बनर्जी से कई महत्वपूर्ण सवाल किए। इनमें मुख्य रूप से यह जानने की कोशिश की गई कि विधानसभा अध्यक्ष को भेजे गए प्रस्ताव की मूल प्रति कहां है और नेता प्रतिपक्ष के चयन को लेकर हुई बैठकों में कौन-कौन मौजूद था।

जांच एजेंसी ने यह भी पूछा कि जिन विधायकों के हस्ताक्षर प्रस्ताव में दर्शाए गए हैं, उनमें से कुछ ने हस्ताक्षर से इनकार क्यों किया है। साथ ही दस्तावेज में अलग-अलग प्रकार की लिखावट और हस्ताक्षरों को लेकर भी सवाल किए गए।

जवाबों से संतुष्ट नहीं दिखी जांच एजेंसी

सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान कई मौकों पर माहौल तनावपूर्ण भी हुआ। बताया जा रहा है कि सीआईडी अधिकारियों ने कुछ जवाबों पर अतिरिक्त स्पष्टीकरण मांगा। हालांकि, जांच एजेंसी या अभिषेक बनर्जी की ओर से पूछताछ के ब्योरे को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

हाईकोर्ट से मिली अंतरिम राहत

इस मामले में अभिषेक बनर्जी को फिलहाल कलकत्ता हाईकोर्ट से राहत मिली हुई है। अदालत ने उन्हें किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से अंतरिम संरक्षण प्रदान किया है। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।

क्या है कथित फर्जी हस्ताक्षर विवाद?

यह विवाद उस प्रस्ताव से जुड़ा है, जो विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के चयन के लिए तैयार किया गया था। आरोप है कि इस दस्तावेज पर कुछ विधायकों की अनुपस्थिति के बावजूद उनके हस्ताक्षर दर्शाए गए। आरोप सामने आने के बाद मामला राजनीतिक और कानूनी विवाद का विषय बन गया, जिसके बाद सीआईडी ने जांच शुरू की।

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