ब्रिटेन में गुलामी के इतिहास पर माफी की तैयारी, एंडी बर्नहम बोले- मुआवजा देने का सवाल नहीं; जानिए पूरा विवाद
गुलामी के लिए माफी मांगने को तैयार ब्रिटेन, लेकिन कैरेबियाई देशों को नहीं देगा मुआवजा; PM एंडी बर्नहम ने रखी अपनी दलील
ब्रिटेन में गुलामी के इतिहास और उसके लिए जिम्मेदारी को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने ट्रांसअटलांटिक गुलाम व्यापार में ब्रिटेन की भूमिका के लिए औपचारिक माफी मांगने की इच्छा जताई है, लेकिन कैरेबियाई देशों को आर्थिक मुआवजा देने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि अतीत में हुई गलतियों को स्वीकार करना जरूरी है, लेकिन आज की पीढ़ी को उन घटनाओं के लिए आर्थिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
बर्नहम ने कैरेबियाई देशों में होने वाले कॉमनवेल्थ लीडर्स समिट में शामिल होने से पहले ब्रिटिश अखबार ‘द गार्जियन’ में एक लेख लिखा। इसमें उन्होंने कहा कि ब्रिटेन को अपने इतिहास से मुंह नहीं मोड़ना चाहिए और गुलामी के दौरान लाखों लोगों ने जो अमानवीय पीड़ा झेली, उसे स्वीकार करना चाहिए।
गुलामी के पीड़ितों के दर्द पर जताया अफसोस
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में कहा कि वह गुलामी के दौर में लाखों लोगों द्वारा झेली गई यातनाओं और पीड़ा के लिए गहरी संवेदना व्यक्त करना चाहते हैं। उन्होंने माना कि उस समय की क्रूरता के निशान आज भी दुनिया में दिखाई देते हैं।
हालांकि, आर्थिक मुआवजे की मांग को उन्होंने उचित समाधान नहीं माना। बर्नहम के अनुसार, मौजूदा ब्रिटिश नागरिकों की उस ऐतिहासिक व्यापार में कोई व्यक्तिगत भूमिका नहीं थी। यह घटनाएं एक अलग समय और अलग कानूनी व्यवस्था के तहत हुई थीं। उन्होंने गुलामी के व्यापार को क्रूर और बर्बर बताते हुए प्रभावित देशों के साथ व्यवस्थित बातचीत करने का भरोसा दिया।
गरीब कॉमनवेल्थ देशों के लिए कर्ज राहत की पहल
कैरेबियाई दौरे के दौरान बर्नहम ने दुनिया के सबसे गरीब कॉमनवेल्थ देशों के लिए कर्ज पुनर्गठन अभियान शुरू करने की घोषणा की है। पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन के नेतृत्व में शुरू होने वाली इस पहल का उद्देश्य गरीब देशों को कम ब्याज दरों और कर्ज चुकाने के लिए लंबी अवधि की सुविधा देना है।
इस कदम के जरिए आर्थिक संकट और कर्ज के बोझ से जूझ रहे देशों को राहत पहुंचाने की योजना है।
किंग चार्ल्स के दौरे के बीच फिर उठा औपनिवेशिक इतिहास का मुद्दा
ब्रिटेन के औपनिवेशिक अतीत और गुलामी का मुद्दा ऐसे समय में चर्चा में आया है, जब किंग चार्ल्स तृतीय नौ दिनों के कैरेबियाई दौरे पर हैं। 56 देशों के संगठन कॉमनवेल्थ में ब्रिटेन की ऐतिहासिक भूमिका को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं।
दौरे के दौरान किंग चार्ल्स ने बहामास में अतीत की पीड़ा का उल्लेख किया। वहीं, गुयाना में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन के दौरान मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
1833 में ब्रिटिश संसद ने खत्म की थी गुलामी
ब्रिटेन ने ट्रांसअटलांटिक गुलाम व्यापार में अपनी भूमिका के लिए अब तक औपचारिक सरकारी माफी नहीं मांगी है और न ही प्रभावित देशों को मुआवजा देने पर सहमति जताई है।
ब्रिटेन का पक्ष रहा है कि उसने सदियों तक गुलामों के व्यापार से आर्थिक लाभ उठाया, लेकिन बाद में इसे समाप्त करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1833 में ब्रिटिश संसद ने अपने साम्राज्य के अधिकांश हिस्सों में गुलामी को गैरकानूनी घोषित करने वाला कानून पारित किया था।
अब बर्नहम के बयान के बाद एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि ऐतिहासिक अन्याय के लिए माफी और आर्थिक मुआवजे में से किसे प्राथमिकता दी जानी चाहिए और प्रभावित देशों की मांगों पर ब्रिटेन आगे क्या कदम उठाएगा।
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