जम्मू-कश्मीर में कैबिनेट विस्तार से बढ़ी नाराजगी, मंत्री पद की दौड़ से बाहर 11 MLA; कफन पहनकर समर्थकों का प्रदर्शन

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जम्मू-कश्मीर में उमर अब्दुल्ला की पार्टी में बढ़ी कलह, मंत्रिमंडल विस्तार से नाराज विधायक बगावती तेवर में

जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर असंतोष खुलकर सामने आ गया है। मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे कई विधायकों की नाराजगी अब पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती बनती जा रही है। कहीं नेतृत्व के खिलाफ नारेबाजी हो रही है, तो कहीं पार्टी छोड़ने और अलग राजनीतिक रास्ता अपनाने की चेतावनी दी जा रही है। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष मुबारक गुल के समर्थकों ने सफेद कफन पहनकर प्रदर्शन किया है। स्थिति को संभालने के लिए पार्टी अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला को खुद हस्तक्षेप करना पड़ा है, लेकिन फिलहाल नाराजगी थमती नहीं दिख रही।

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद क्यों भड़के विधायक?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंगलवार को परिवहन मंत्री सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से हटाकर चार नए मंत्रियों को शामिल किया। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के प्रावधानों के तहत 90 सदस्यीय विधानसभा वाले केंद्रशासित प्रदेश में मुख्यमंत्री समेत अधिकतम नौ सदस्य मंत्रिपरिषद का हिस्सा हो सकते हैं।

मंत्रिमंडल में जगह पाने के लिए करीब डेढ़ दर्जन विधायक दावेदारी कर रहे थे, लेकिन केवल चार को मौका मिला। इससे कई वरिष्ठ नेताओं की उम्मीदों को झटका लगा। रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्री पद से वंचित 11 विधायक शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए, जबकि कुछ नेताओं ने समारोह में पहुंचकर भी अपनी नाराजगी जाहिर की।

विरोध केवल मंत्री पद नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। कुछ विधायकों ने पार्टी में फैसले लेने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि वरिष्ठ नेताओं और विधायकों की राय को पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा।

मुबारक गुल के समर्थक कफन पहनकर सड़क पर उतरे
पूर्व विधानसभा अध्यक्ष मुबारक गुल के समर्थकों का विरोध पार्टी के लिए बड़ी चिंता बन गया है। समर्थकों ने सफेद कफन पहनकर प्रदर्शन किया और नेतृत्व से फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान आत्मदाह की धमकी दिए जाने की भी खबर है।

डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने गुल को मनाने के लिए उन्हें पार्टी का महासचिव बनाने की पेशकश की, लेकिन इससे विवाद शांत नहीं हुआ। गुल के मुताबिक, उनके समर्थक फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और उनसे इस्तीफा देने के लिए कह रहे हैं। मंगलवार से शुरू हुआ प्रदर्शन बुधवार को भी जारी रहा। गुल ने चार नवंबर को अपना अगला कदम स्पष्ट करने की बात कही है।

नजीर गुरेजी और अन्य विधायकों ने भी जताई नाराजगी
पार्टी नेतृत्व के सामने चुनौती केवल मुबारक गुल तक सीमित नहीं है। पूर्व मंत्री नजीर अहमद गुरेजी को भी फारूक अब्दुल्ला ने फोन कर मनाने की कोशिश की, लेकिन कथित तौर पर बात नहीं बनी। गुरेजी ने भी अलग रास्ता चुनने की चेतावनी दी है।

विधायक अब्दुल मजीद लारमी ने अपनी वरिष्ठता की अनदेखी किए जाने पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों का सामना करना मुश्किल हो रहा है।

पुंछ के विधायक एजाज जान और अर्जुन सिंह राजू भी असंतोष जताने वाले नेताओं में शामिल हैं। एजाज जान ने पहाड़ी समुदाय की अनदेखी का आरोप लगाया और कहा कि उनके परिवार ने पार्टी के लिए लंबे समय तक संघर्ष किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें उचित महत्व नहीं दिया गया।

पार्टी नेतृत्व पर फैसले केंद्रीकृत करने का आरोप
नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर उठ रहे सवालों में नेतृत्व की कार्यशैली भी शामिल है। उत्तरी कश्मीर के एक विधायक ने आरोप लगाया कि पार्टी के अहम फैसले मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनके कुछ करीबी नेता ही लेते हैं। इससे वरिष्ठ नेताओं में उपेक्षा की भावना बढ़ रही है।

पार्टी छोड़ चुके पूर्व विधायक सैयद मोहम्मद अखून ने भी वफादारी और आंतरिक लोकतंत्र की अनदेखी को अपने अलग होने की वजह बताया। उन्होंने दावा किया कि नेतृत्व को पहले ही कुछ नेताओं के बढ़ते प्रभाव को लेकर आगाह किया गया था, लेकिन शिकायतों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया।

फारूक अब्दुल्ला असंतुष्टों को मनाने में जुटे
बढ़ते विरोध के बीच नेशनल कॉन्फ्रेंस का शीर्ष नेतृत्व असंतुष्ट विधायकों को मनाने की कोशिश कर रहा है। फारूक अब्दुल्ला और वरिष्ठ नेता अब्दुल रहीम राथर कई नेताओं से संपर्क कर चुके हैं। संगठन में नई जिम्मेदारियां देने और फेरबदल के जरिए नाराजगी दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक, नेतृत्व को मंत्रिमंडल विस्तार के बाद कुछ असंतोष की आशंका थी, लेकिन विरोध इतने बड़े स्तर पर सामने आएगा, इसका अंदाजा नहीं था।

क्या उमर सरकार के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें?
राजनीतिक मामलों के जानकार बिलाल बशीर के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सामने आया विरोध नेशनल कॉन्फ्रेंस के भीतर मौजूद संगठनात्मक चुनौतियों को उजागर करता है। सांसद आगा रुहुल्ला पहले से ही पार्टी नेतृत्व के सामने असहज स्थिति पैदा कर चुके हैं। अब यदि असंतुष्ट विधायक भी खुलकर विरोध जारी रखते हैं, तो नेतृत्व के सामने मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नाराज विधायक पार्टी के भीतर रहकर अपनी मांगें उठाएंगे या कोई बड़ा कदम उठाएंगे। लेकिन मंत्रिमंडल विस्तार के बाद शुरू हुआ विवाद उमर अब्दुल्ला और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व के लिए संगठनात्मक एकजुटता बनाए रखने की परीक्षा जरूर बन गया है।

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