उत्तर प्रदेश का सबसे लंबा गंगा एक्सप्रेसवे अब आम यात्रियों के लिए खोल दिया गया है, और इसके साथ ही इसे मेरठ से आगे हरिद्वार तक बढ़ाने की बड़ी घोषणा भी हुई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरदोई में उद्घाटन के दौरान बताया कि इस नए सेक्शन को अपर गंगा कैनाल एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया जाएगा, जिससे पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के बीच सीधी और तेज कनेक्टिविटी बनेगी।
किन जिलों को होगा सबसे ज्यादा फायदा
मेरठ से शुरू होकर यह एक्सप्रेसवे मुजफ्फरनगर और बिजनौर होते हुए उत्तराखंड सीमा तक जाएगा। मेरठ के बिजौली गांव से इसकी शुरुआत होगी, जबकि मुजफ्फरनगर इस रूट का प्रमुख केंद्र बनेगा।
रूट में बदलाव के बाद अब यह बिजनौर के मंडावर और चांदपुर क्षेत्रों से गुजरते हुए हरिद्वार पहुंचेगा।
गांवों और कस्बों तक पहुंचेगा फायदा
मेरठ के रोहटा, जानी, दौराला और खरखौदा ब्लॉक, मुजफ्फरनगर के खतौली, जानसठ, भोपा और तितावी जैसे इलाके सीधे इस एक्सप्रेसवे से जुड़ेंगे। बिजनौर के नजीबाबाद, मंडावर, चांदपुर और गंगा खादर क्षेत्र के कई गांव भी इससे लाभान्वित होंगे। इससे स्थानीय कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी।
हरिद्वार से सीधा कनेक्शन
एक्सप्रेसवे उत्तराखंड में लक्सर और कनखल के पास से गुजरते हुए हरिद्वार से जुड़ेगा। इससे यूपी से हरिद्वार का सफर पहले से कहीं ज्यादा आसान और तेज हो जाएगा।
प्रोजेक्ट की तैयारी और लागत
करीब 110 से 140 किलोमीटर लंबे इस धार्मिक कॉरिडोर की अनुमानित लागत लगभग 5000 करोड़ रुपये है। DPR तैयार की जा रही है और कई हिस्सों में सर्वे शुरू हो चुका है। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी जल्द शुरू होने की उम्मीद है। लक्ष्य है कि 2028-29 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा कर लिया जाए।
धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
प्रयागराज से हरिद्वार तक तेज कनेक्टिविटी बनने से धार्मिक पर्यटन को बड़ा बूस्ट मिलेगा। गढ़मुक्तेश्वर, कल्कि धाम, शुक्रताल, विदुर कुटी जैसे गंगा किनारे बसे प्रमुख तीर्थस्थलों को जोड़कर एक मजबूत धार्मिक सर्किट विकसित होगा।
यात्रा समय होगा आधा
इस एक्सप्रेसवे के पूरा होने के बाद प्रयागराज से हरिद्वार की दूरी, जो अभी 12–14 घंटे लगती है, घटकर 7–8 घंटे रह जाएगी। वहीं मेरठ, मुजफ्फरनगर और बिजनौर से हरिद्वार महज 1.5 से 2 घंटे में पहुंचा जा सकेगा। कांवड़ यात्रा के दौरान जाम से भी राहत मिलने की उम्मीद है।
चारधाम यात्रा के लिए गेमचेंजर
हरिद्वार, जिसे चारधाम यात्रा का प्रवेश द्वार माना जाता है, इस एक्सप्रेसवे से और ज्यादा सुलभ हो जाएगा। इससे बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जाने वाले श्रद्धालुओं को बड़ी सुविधा मिलेगी।
कुल मिलाकर, गंगा एक्सप्रेसवे का यह विस्तार पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड के लिए कनेक्टिविटी, पर्यटन और औद्योगिक विकास के लिहाज से एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
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