अगस्त 2026 में भारत के ऊर्जा आयात से जुड़ी तस्वीर में अहम रणनीतिक बदलाव सामने आया है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और दबाव के बावजूद रूस भारतीय रिफाइनरियों के लिए कच्चे तेल का सबसे बड़ा स्रोत बना हुआ है।
हालांकि, चीन की ओर से रूसी तेल की खरीद बढ़ने और रूस की तरफ से मिलने वाली छूट कम होने का असर भारत के आयात पर भी पड़ा है। अगस्त में भारत द्वारा रूस से खरीदे गए कच्चे तेल की मात्रा में मामूली कमी दर्ज की गई।
इसी दौरान रूस के ऊर्जा बाजार से जुड़ा एक अलग घटनाक्रम भी सामने आया। यूक्रेन के हमलों में रूसी रिफाइनरियों को नुकसान पहुंचने के बाद वहां रिफाइंड ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हुई है। ऐसे में भारत अब रूस को पेट्रोल और डीजल निर्यात करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो गया है।
भारत के अलावा तुर्की और मोरक्को भी रूस को पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति कर रहे हैं। इस तरह एक ओर रूस भारत को कच्चे तेल का प्रमुख आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, तो दूसरी ओर भारत रूसी बाजार में रिफाइंड ईंधन की आपूर्ति करने वाले अहम देशों में उभर रहा है।
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